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राहुल द्रविड़ भारतीय क्रिकेट के सबसे महान और विश्वसनीय बल्लेबाजों में से एक हैं। 11 जनवरी 1973 को इंदौर में जन्मे द्रविड़ को द वॉल और मिस्टर डिपेंडेबल के नाम से जाना जाता है। उन्होंने अपनी शानदार रक्षात्मक तकनीक, एकाग्रता और धैर्य से टेस्ट क्रिकेट में 13288 रन बनाए और तीन नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए एक नया मानक स्थापित किया।
द्रविड़ ने 1996 से 2012 तक भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया और इस दौरान 164 टेस्ट और 344 ODI मैच खेले। उन्होंने कुल 24208 अंतरराष्ट्रीय रन बनाए जो टेस्ट इतिहास में चौथा सबसे बड़ा आंकड़ा है। वे सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण के साथ फैब फोर का हिस्सा थे जिसने 2000 के दशक में भारतीय बल्लेबाजी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
क्रिकेट करियर के बाद द्रविड़ ने कोचिंग में कदम रखा। वे भारत के अंडर-19 और इंडिया ए टीम के कोच रहे। 2021 में उन्हें भारतीय राष्ट्रीय टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया गया। 2024 में उन्होंने कोच के रूप में भारत को T20 विश्व कप जिताया। 2018 में उन्हें ICC हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया।
| विवरण | जानकारी |
| पूरा नाम | राहुल शरद द्रविड़ |
| जन्म तिथि | 11 जनवरी 1973 |
| जन्म स्थान | इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत |
| उम्र | 51 वर्ष (2024 में) |
| पिता का नाम | शरद द्रविड़ |
| माता का नाम | पुष्पा द्रविड़ (आर्किटेक्चर प्रोफेसर) |
| भाई | विजय द्रविड़ |
| पत्नी का नाम | विजेता पेंढारकर (सर्जन) |
| बच्चे | समित द्रविड़, अन्वय द्रविड़ |
| शिक्षा | कॉमर्स ग्रेजुएट, MBA (अधूरा) |
| खेल | क्रिकेट |
| बल्लेबाजी शैली | दाएं हाथ का बल्लेबाज़ |
| गेंदबाजी शैली | दाएं हाथ का ऑफ स्पिन |
| भूमिका | बल्लेबाज़, विकेटकीपर (ODI में) |
| घरेलू टीम | कर्नाटक |
| ODI डेब्यू | 3 अप्रैल 1996 बनाम श्रीलंका |
| टेस्ट डेब्यू | 20 जून 1996 बनाम इंग्लैंड |
| टेस्ट मैच | 164 मैच |
| टेस्ट रन | 13288 रन (औसत 52.31) |
| टेस्ट शतक | 36 शतक |
| ODI मैच | 344 मैच |
| ODI रन | 10889 रन |
| कुल अंतरराष्ट्रीय रन | 24208 रन |
| सर्वोच्च स्कोर | 270 रन (टेस्ट में पाकिस्तान के खिलाफ) |
| कैच | 210 (टेस्ट में सर्वाधिक) |
| उपनाम | द वॉल, मिस्टर डिपेंडेबल, जैमी |
| पुरस्कार | अर्जुन पुरस्कार (1998), पद्म श्री (2004), पद्म भूषण (2013) |
| कोचिंग | भारतीय टीम के मुख्य कोच (2021-2024) |
| प्रमुख उपलब्धि | 2024 T20 विश्व कप विजेता कोच, ICC Hall of Fame (2018) |

राहुल शरद द्रविड़ का जन्म 11 जनवरी 1973 को मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में एक मराठी ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिता शरद द्रविड़ एक जैम और जेली बनाने वाली कंपनी में काम करते थे। इसी वजह से द्रविड़ को जैमी का उपनाम मिला। उनकी माता पुष्पा द्रविड़ बैंगलोर के विश्वेश्वरैया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में आर्किटेक्चर की प्रोफेसर थीं।
द्रविड़ के जन्म के कुछ समय बाद उनका परिवार कर्नाटक की राजधानी बैंगलोर में बस गया। यहीं पर द्रविड़ का बचपन बीता। उनकी मातृभाषा मराठी है और वे कन्नड़, अंग्रेजी और हिंदी में भी धाराप्रवाह बोल सकते हैं। द्रविड़ का एक छोटा भाई विजय भी है।
द्रविड़ ने अपनी स्कूली शिक्षा बैंगलोर के सेंट जोसेफ बॉयज हाई स्कूल से पूरी की। वे पढ़ाई में बहुत अच्छे थे। उन्होंने सेंट जोसेफ कॉलेज ऑफ कॉमर्स से कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया। बाद में उन्होंने सेंट जोसेफ कॉलेज ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन से एमबीए की पढ़ाई शुरू की लेकिन भारतीय टीम में चयन होने के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी।
12 साल की उम्र में द्रविड़ ने क्रिकेट खेलना शुरू किया। उनके कोच केकी तारापोर थे जो भारत के कई महान क्रिकेटरों के कोच रहे। द्रविड़ ने कर्नाटक के लिए अंडर-15, अंडर-17 और अंडर-19 स्तर पर क्रिकेट खेला।
1990-91 में राहुल द्रविड़ ने कर्नाटक के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में डेब्यू किया। उनकी निरंतरता और ठोस तकनीक ने सबका ध्यान खींचा। 1991 में उन्हें दक्षिण जोन और दिलीप ट्रॉफी टीम में चुना गया।
घरेलू क्रिकेट में द्रविड़ का प्रदर्शन लगातार शानदार रहा। उन्होंने लगातार रन बनाए और अपनी तकनीक को निखारा। 1994 में उन्हें पहली बार भारतीय टीम के लिए चुना गया लेकिन उन्हें प्लेइंग इलेवन में मौका नहीं मिला।
द्रविड़ को 1996 विश्व कप टीम में नहीं चुना गया। इस पर एक भारतीय अखबार ने सुर्खी लिखी – राहुल द्रविड़ गेट्स ए रॉ डील। लेकिन द्रविड़ ने हार नहीं मानी और घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करते रहे।

3 अप्रैल 1996 को सिंगापुर में श्रीलंका के खिलाफ राहुल द्रविड़ ने अपना ODI डेब्यू किया। यह मैच 1996 विश्व कप के तुरंत बाद हुए सिंगर कप का हिस्सा था। द्रविड़ ने विनोद कांबली की जगह ली।
हालांकि द्रविड़ का डेब्यू सफल नहीं रहा। वे मुथैया मुरलीधरन की गेंद पर केवल 3 रन बनाकर आउट हो गए। अगले मैच में पाकिस्तान के खिलाफ भी वे केवल 4 रन बनाकर रन आउट हो गए। यह शुरुआत निराशाजनक थी लेकिन द्रविड़ ने धैर्य रखा।
20 जून 1996 को लंदन के लॉर्ड्स मैदान में इंग्लैंड के खिलाफ राहुल द्रविड़ ने अपना टेस्ट डेब्यू किया। जब कोच संदीप पाटिल ने उन्हें बताया कि वे लॉर्ड्स में बल्लेबाजी करेंगे तो द्रविड़ का चेहरा खुशी से चमक उठा। हर क्रिकेटर का सपना होता है कि वह लॉर्ड्स में खेले।
द्रविड़ ने साथी डेब्यू खिलाड़ी सौरव गांगुली के साथ बल्लेबाजी की। दोनों ने शानदार बल्लेबाजी की। द्रविड़ ने बेहद अनुशासित और तकनीकी रूप से सही बल्लेबाजी की। वे 95 रन बनाकर आउट हो गए। शतक से केवल 5 रन दूर रहने का उन्हें बहुत दुख हुआ लेकिन उनकी बल्लेबाजी ने सबको प्रभावित किया।
इस प्रदर्शन के बाद द्रविड़ भारतीय टीम के नियमित सदस्य बन गए। हालांकि शुरुआती सालों में वे अर्धशतक को शतक में नहीं बदल पाते थे।

1996-97 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जोहान्सबर्ग में द्रविड़ ने अपनी पहली बड़ी उपलब्धि हासिल की। उन्होंने अपना पहला टेस्ट शतक बनाया। उन्होंने 148 रन बनाए। यह पारी द्रविड़ के करियर का टर्निंग पॉइंट बन गई।
इस शतक के साथ द्रविड़ ने साबित कर दिया कि वे केवल अर्धशतक बनाने वाले बल्लेबाज़ नहीं बल्कि बड़े स्कोर बनाने में भी सक्षम हैं। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
2000 का दशक राहुल द्रविड़ के करियर का सबसे शानदार दौर था। इस दौरान वे फैब फोर का हिस्सा थे – सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण। इन चारों ने मिलकर भारतीय बल्लेबाजी को विश्व स्तर पर स्थापित किया।
मार्च 2001 में कोलकाता के ईडन गार्डन में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत ने इतिहास रच दिया। फॉलो ऑन खेलते हुए भारत ने मैच जीत लिया। द्रविड़ ने लक्ष्मण के साथ 376 रन की पार्टनरशिप बनाई। द्रविड़ ने 180 रन बनाए। यह टेस्ट क्रिकेट की सबसे महान पारियों में से एक मानी जाती है।
2002 में इंग्लैंड के खिलाफ हेडिंग्ले में द्रविड़ ने 148 रन बनाए। वेस्टइंडीज के खिलाफ उन्होंने कई शतक बनाए। 2003-04 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड में उन्होंने 233 रन बनाए। यह उनका सर्वोच्च स्कोर था उस समय तक।
अप्रैल 2004 में रावलपिंडी में पाकिस्तान के खिलाफ राहुल द्रविड़ ने अपनी करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी खेली। उन्होंने 270 रन बनाए। यह किसी भारतीय बल्लेबाज़ द्वारा पाकिस्तान में बनाया गया सर्वोच्च स्कोर है। यह द्रविड़ का करियर का सर्वोच्च स्कोर भी है।
इस पारी में द्रविड़ ने 495 गेंदें खेलीं और 32 चौके मारे। उन्होंने दिन भर पाकिस्तानी गेंदबाजों को परेशान किया। यह पारी द वॉल की धैर्य और एकाग्रता का सबसे बड़ा उदाहरण है।
2000 से 2004 के बीच द्रविड़ ने ODI में विकेटकीपर की भूमिका भी निभाई। यह निर्णय विवादास्पद था क्योंकि द्रविड़ पहले से ही नंबर तीन पर बल्लेबाजी करते थे। विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी उनके बल्लेबाजी पर असर डाल सकती थी।
लेकिन द्रविड़ ने टीम के लिए यह जिम्मेदारी स्वीकार की। उन्होंने 73 ODI में विकेटकीपिंग की और 120 कैच और 14 स्टंपिंग लिए। हालांकि बाद में उन्होंने खुद स्वीकार किया कि विकेटकीपिंग ने उनकी बल्लेबाजी को प्रभावित किया।
2005 में जब सौरव गांगुली को टीम से बाहर कर दिया गया तो राहुल द्रविड़ को भारतीय टीम का कप्तान बनाया गया। यह द्रविड़ के करियर का एक नया अध्याय था।
कप्तान के रूप में द्रविड़ का टेस्ट रिकॉर्ड बेहद शानदार था। उन्होंने 25 टेस्ट मैचों में कप्तानी की जिनमें से 8 जीते, 6 हारे और 11 ड्रॉ रहे। 2006 में वेस्टइंडीज में भारत ने श्रृंखला 1-0 से जीती। 2007 में इंग्लैंड में भारत ने सीरीज 1-0 से जीती।
2007 में द्रविड़ ने बैंगलोर में बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट में 129 रन बनाए। यह कप्तान के रूप में उनका आखिरी शतक था।
ODI में द्रविड़ की कप्तानी उतनी सफल नहीं रही। 2007 विश्व कप में भारत ग्रुप स्टेज में ही बाहर हो गया। यह भारतीय क्रिकेट के लिए बहुत बड़ा झटका था। इसके बाद द्रविड़ ने कप्तानी छोड़ दी।
2007 विश्व कप के बाद द्रविड़ के फॉर्म में गिरावट आई। उन्हें कई मैचों में असफलता मिली। मीडिया और आलोचकों ने उनकी रिटायरमेंट की मांग करनी शुरू कर दी। कहा जाने लगा कि द्रविड़ का समय खत्म हो गया है।
2011 में इंग्लैंड दौरे पर द्रविड़ ने शानदार वापसी की। उन्होंने चार टेस्ट मैचों में 461 रन बनाए जिसमें तीन शतक भी शामिल थे। लॉर्ड्स में उन्होंने 103 रन बनाए। यह उनका लॉर्ड्स में दूसरा शतक था।
इस प्रदर्शन से साबित हो गया कि द्रविड़ अभी भी विश्व के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में से एक हैं। उन्होंने 38 साल की उम्र में अपनी क्लास दिखाई।
9 मार्च 2012 को राहुल द्रविड़ ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की। उनका आखिरी टेस्ट मैच जनवरी 2012 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड में खेला गया। यह मैच भारत हार गया लेकिन द्रविड़ ने 48 रन बनाए।
द्रविड़ ने कहा कि वे अपनी शर्तों पर रिटायर हो रहे हैं। उन्होंने 16 साल का शानदार करियर पूरा किया। उनका आखिरी ODI 16 सितंबर 2011 को इंग्लैंड के खिलाफ था। उन्होंने T20I नहीं खेला।
रिटायरमेंट के समय द्रविड़ के आंकड़े शानदार थे:
2008 में जब IPL शुरू हुआ तो राहुल द्रविड़ को रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने आइकॉन प्लेयर के रूप में साइन किया। पहले तीन सीजन में वे बैंगलोर के कप्तान भी रहे।
2011 में राजस्थान रॉयल्स ने द्रविड़ को खरीदा। 2012 और 2013 सीजन में वे राजस्थान के कप्तान भी रहे। IPL 2013 के बाद द्रविड़ ने IPL से संन्यास ले लिया।
द्रविड़ का IPL रिकॉर्ड बहुत शानदार नहीं रहा। उन्होंने 89 मैचों में केवल 2174 रन बनाए। उनकी स्ट्राइक रेट 115.02 थी। T20 फॉर्मेट उनकी शैली के लिए उपयुक्त नहीं था लेकिन उन्होंने हमेशा टीम के लिए खेला।

रिटायरमेंट के बाद द्रविड़ ने कोचिंग में रुचि दिखाई। वे दिल्ली डेयरडेविल्स और राजस्थान रॉयल्स के मेंटर रहे।
2016 में द्रविड़ को भारत अंडर-19 टीम का कोच नियुक्त किया गया। उन्होंने इंडिया ए टीम की भी कोचिंग की। द्रविड़ के मार्गदर्शन में कई युवा खिलाड़ी सामने आए।
2018 में द्रविड़ के कोचिंग में भारत अंडर-19 टीम ने विश्व कप जीता। यह भारत का चौथा अंडर-19 विश्व कप खिताब था। पृथ्वी शॉ कप्तान थे और शुभमन गिल, कार्तिक त्यागी जैसे खिलाड़ी टीम में थे।
रिषभ पंत, हार्दिक पांड्या, अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर, अर्शदीप सिंह जैसे कई खिलाड़ियों ने द्रविड़ के मार्गदर्शन में खेला।
नवंबर 2021 में राहुल द्रविड़ को भारतीय राष्ट्रीय टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया गया। उन्होंने रवि शास्त्री की जगह ली। यह भारतीय क्रिकेट के लिए बड़ी खबर थी।
द्रविड़ के कोचिंग में भारत ने कई सफलताएं हासिल कीं। 2023 में भारत ने ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट श्रृंखला जीती। 2023 विश्व कप में भारत फाइनल तक पहुंचा।

29 जून 2024 को बारबाडोस में खेले गए T20 विश्व कप फाइनल में भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 7 रन से हराकर विश्व कप जीत लिया। यह 2007 के बाद भारत का दूसरा T20 विश्व कप था।
राहुल द्रविड़ के कोचिंग में यह भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि थी। रोहित शर्मा, विराट कोहली, हार्दिक पांड्या और अर्शदीप सिंह जैसे खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। द्रविड़ ने टीम को शांत और फोकस्ड रखा।
विश्व कप जीतने के बाद द्रविड़ बहुत भावुक हो गए। उनकी आंखों में आंसू थे। खिलाड़ी के रूप में विश्व कप नहीं जीत पाने का दुख कोच के रूप में खुशी में बदल गया।
विश्व कप के बाद द्रविड़ ने कोच पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि अब नए कोच को मौका मिलना चाहिए।

1996 में राहुल द्रविड़ की मुलाकात विजेता पेंढारकर से हुई। विजेता एक सर्जन हैं और बैंगलोर में प्रैक्टिस करती हैं। चार साल की दोस्ती के बाद दोनों ने 4 मई 2003 को शादी कर ली।
द्रविड़ और विजेता के दो बेटे हैं – समित द्रविड़ और अन्वय द्रविड़। समित 2005 में और अन्वय 2009 में पैदा हुए। समित द्रविड़ ने भी क्रिकेट खेलना शुरू किया है और कर्नाटक की अंडर-14 टीम के लिए खेल चुके हैं।
द्रविड़ एक निजी व्यक्ति हैं। वे अपने परिवार के बारे में मीडिया में बहुत कम बात करते हैं। वे बैंगलोर में रहते हैं और सादा जीवन जीते हैं।
द्रविड़ को पढ़ना बहुत पसंद है। वे इतिहास और विज्ञान की किताबें पढ़ते हैं। उन्हें संगीत सुनना भी पसंद है। वे एक शांत और संयमित व्यक्ति हैं।
राहुल द्रविड़ की बल्लेबाजी शैली की मुख्य विशेषताएं:
द्रविड़ एक शानदार फील्डर थे। उन्होंने टेस्ट में 210 कैच लिए जो गैर-विकेटकीपरों में सबसे ज्यादा है। वे ज्यादातर स्लिप में फील्डिंग करते थे। उनकी रिफ्लेक्स बहुत तेज़ थी।
राहुल द्रविड़ ने भारतीय क्रिकेट को एक विश्वसनीय और तकनीकी रूप से सही बल्लेबाज़ दिया। उन्होंने साबित किया कि टेस्ट क्रिकेट में धैर्य और तकनीक सबसे महत्वपूर्ण हैं।
द्रविड़ ने विदेशों में भारत की जीत में बड़ी भूमिका निभाई। ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका जैसी मुश्किल परिस्थितियों में उन्होंने लगातार रन बनाए। उनकी वजह से भारत विदेशों में मजबूत टीम बना।
कोच के रूप में द्रविड़ ने युवा खिलाड़ियों को तैयार किया। हार्दिक पांड्या, रिषभ पंत, शुभमन गिल, अर्शदीप सिंह जैसे कई खिलाड़ी द्रविड़ के मार्गदर्शन में खेले। 2024 T20 विश्व कप जीतना उनकी कोचिंग की सफलता का प्रमाण है।

राहुल द्रविड़ की कहानी मेहनत, समर्पण और विनम्रता की कहानी है। उन्होंने कभी शॉर्टकट नहीं लिया। उन्होंने हमेशा सही तरीके से खेला और टीम को पहले रखा।
द्रविड़ युवाओं से कहते हैं कि प्रक्रिया पर ध्यान दें, परिणाम पर नहीं। उनका मानना है कि अगर आप सही तरीके से मेहनत करेंगे तो परिणाम अपने आप आएंगे।
द्रविड़ ने साबित किया कि सफलता के लिए चमक-दमक की जरूरत नहीं होती। उन्होंने सादा जीवन जीया लेकिन क्रिकेट के मैदान पर अपने प्रदर्शन से बोले। उनकी विनम्रता और संयम सभी के लिए सीख है।
राहुल द्रविड़ भारतीय क्रिकेट के महानतम बल्लेबाजों में से एक हैं। 13288 टेस्ट रन और 52.31 की औसत उनकी महानता को दर्शाती है। द वॉल और मिस्टर डिपेंडेबल के नाम से जाने जाने वाले द्रविड़ ने टेस्ट क्रिकेट में नए मानक स्थापित किए।
द्रविड़ की कहानी केवल क्रिकेट की कहानी नहीं है बल्कि जीवन मूल्यों की कहानी है। उन्होंने दिखाया कि मेहनत, समर्पण, विनम्रता और टीम भावना से कोई भी शिखर हासिल किया जा सकता है।
कोच के रूप में 2024 T20 विश्व कप जीतकर द्रविड़ ने अपने करियर को परफेक्ट तरीके से पूरा किया। वे अब भारतीय क्रिकेट के लिए एक प्रेरणा हैं। राहुल द्रविड़ का नाम हमेशा भारतीय क्रिकेट के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा रहेगा।
राहुल द्रविड़ भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाज हैं जिन्हें द वॉल और मिस्टर डिपेंडेबल कहा जाता है। वे 2024 T20 विश्व कप विजेता कोच भी हैं।
राहुल द्रविड़ का जन्म 11 जनवरी 1973 को मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ था।
राहुल द्रविड़ ने 164 टेस्ट मैचों में 13288 रन बनाए जो 52.31 की औसत है।
राहुल द्रविड़ को उनकी मजबूत रक्षात्मक तकनीक, धैर्य और विरोधी गेंदबाजों को रोकने की क्षमता के कारण द वॉल कहा जाता है।
राहुल द्रविड़ का सर्वोच्च टेस्ट स्कोर 270 रन है जो उन्होंने 2004 में पाकिस्तान के खिलाफ रावलपिंडी में बनाया।
राहुल द्रविड़ ने अपने करियर में 36 टेस्ट शतक बनाए।
राहुल द्रविड़ ने 2005 से 2007 तक भारतीय टीम की कप्तानी की।
राहुल द्रविड़ की पत्नी विजेता पेंढारकर हैं जो एक सर्जन हैं।
राहुल द्रविड़ को अर्जुन पुरस्कार 1998, पद्म श्री 2004, पद्म भूषण 2013 और ICC हॉल ऑफ फेम 2018 से सम्मानित किया गया।
राहुल द्रविड़ ने 9 मार्च 2012 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की।
राहुल द्रविड़ ने टेस्ट में 210 कैच लिए जो गैर विकेटकीपरों में विश्व रिकॉर्ड है।
राहुल द्रविड़ नवंबर 2021 में भारतीय राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच बने।
राहुल द्रविड़ ने कोच के रूप में 2024 T20 विश्व कप जीता।
राहुल द्रविड़ के दो बेटे हैं समित द्रविड़ और अन्वय द्रविड़।
राहुल द्रविड़ ने 344 ODI मैचों में 10889 रन बनाए।
राहुल द्रविड़ कर्नाटक क्रिकेट टीम के लिए घरेलू क्रिकेट खेलते थे।
राहुल द्रविड़ ने रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और राजस्थान रॉयल्स के लिए IPL में खेला।
राहुल द्रविड़ के पिता जैम बनाने वाली कंपनी में काम करते थे इसलिए उन्हें जैमी का उपनाम मिला।
राहुल द्रविड़ ने अपने टेस्ट डेब्यू में लॉर्ड्स में 95 रन बनाए थे।
राहुल द्रविड़ को उनकी मजबूत तकनीक, धैर्य, विनम्रता, टीम भावना और टेस्ट क्रिकेट में शानदार योगदान के लिए याद किया जाता है।