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इरफान खान पठान भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रतिभाशाली ऑलराउंडरों में से एक हैं। 27 अक्टूबर 1984 को गुजरात के बड़ौदा (वडोदरा) में जन्मे इरफान ने बहुत कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में धमाकेदार एंट्री ली। वे बाएं हाथ के तेज़ मध्यम गेंदबाज़ और बाएं हाथ के बल्लेबाज़ हैं जिन्होंने अपनी स्विंग गेंदबाजी से पाकिस्तान के महान गेंदबाज़ वसीम अकरम की तुलना अर्जित की।
इरफान पठान 2007 के पहले ICC T20 विश्व कप के विजेता भारतीय टीम के सदस्य रहे। फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने 3/16 के शानदार आंकड़े लिए और मैन ऑफ द मैच चुने गए। 2006 में उन्होंने करांची में पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच के पहले ओवर में हैट्रिक लेकर इतिहास रच दिया। वे ऐसा करने वाले विश्व के एकमात्र गेंदबाज़ हैं।
इरफान ने 29 टेस्ट, 120 ODI और 24 T20I मैच खेले। उन्होंने टेस्ट में 100 विकेट और 1105 रन बनाए। ODI में 173 विकेट और 1544 रन बनाए। वे सबसे तेज़ 100 ODI विकेट लेने वाले भारतीय गेंदबाज़ रहे। 2020 में उन्होंने क्रिकेट से संन्यास ले लिया और अब कमेंटेटर और एनालिस्ट हैं।
| विवरण | जानकारी |
| पूरा नाम | इरफान खान पठान |
| जन्म तिथि | 27 अक्टूबर 1984 |
| जन्म स्थान | बड़ौदा (वडोदरा), गुजरात, भारत |
| उम्र | 40 वर्ष (2024 में) |
| पिता का नाम | मोहम्मद शाह पठान (मुअज्जिन) |
| भाई | युसूफ पठान (बड़े भाई, क्रिकेटर) |
| पत्नी का नाम | सफा बेग (मॉडल) |
| बच्चे | दो बेटे |
| नस्ल | पठान (पश्तून) |
| खेल | क्रिकेट |
| बल्लेबाजी शैली | बाएं हाथ का बल्लेबाज़ |
| गेंदबाजी शैली | बाएं हाथ का तेज़ मध्यम गेंदबाज़ |
| भूमिका | ऑलराउंडर |
| घरेलू टीम | बड़ौदा, जम्मू और कश्मीर |
| ODI डेब्यू | 2 अक्टूबर 2003 बनाम ऑस्ट्रेलिया |
| टेस्ट डेब्यू | 8 दिसंबर 2003 बनाम ऑस्ट्रेलिया |
| T20I डेब्यू | 1 दिसंबर 2006 बनाम दक्षिण अफ्रीका |
| टेस्ट मैच | 29 मैच |
| टेस्ट रन/विकेट | 1105 रन, 100 विकेट |
| ODI मैच | 120 मैच |
| ODI रन/विकेट | 1544 रन, 173 विकेट |
| T20I मैच | 24 मैच |
| प्रमुख उपलब्धि | 2007 T20 विश्व कप विजेता, टेस्ट के पहले ओवर में हैट्रिक |
| सर्वोच्च स्कोर | 102 (टेस्ट में पाकिस्तान के खिलाफ) |
| सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी | 7/59 (टेस्ट), 5/27 (ODI) |
| पुरस्कार | ICC Emerging Player of the Year (2004) |
| रिटायरमेंट | जनवरी 2020 |

इरफान खान पठान का जन्म 27 अक्टूबर 1984 को गुजरात के बड़ौदा (अब वडोदरा) शहर में हुआ। उनका परिवार पठान (पश्तून) समुदाय से है जो गुजरात में रहता है। इरफान के पिता मोहम्मद शाह पठान बड़ौदा की एक मस्जिद में मुअज्जिन (अजान देने वाले) के रूप में काम करते थे।
इरफान का परिवार बहुत गरीब था। वे अपने बड़े भाई युसूफ पठान के साथ मस्जिद में ही रहते थे। उनके माता-पिता चाहते थे कि दोनों भाई इस्लामिक विद्वान बनें लेकिन इरफान और युसूफ दोनों को क्रिकेट से प्यार था।
शुरुआत में इरफान की गेंद क्रिकेट पिच के दूसरे छोर तक भी नहीं पहुंचती थी। लेकिन कठोर मेहनत ने उन्हें आगे बढ़ाया। वे रोज़ 6 घंटे तपती धूप में प्रैक्टिस करते थे। उनके परिवार के अनुशासन और मेहनत ने उन्हें एक महान क्रिकेटर बनाया।
इरफान के बड़े भाई युसूफ पठान भी क्रिकेटर बने। युसूफ भारतीय टीम में बल्लेबाज़ और ऑफ स्पिनर के रूप में खेले। दोनों भाइयों ने एक साथ भारत के लिए कई मैच खेले।
इरफान पठान को पूर्व भारतीय कप्तान दत्ता गायकवाड़ ने पहचाना। गायकवाड़ ने इरफान को बड़ौदा की अंडर-14 टीम में चुना। जब इरफान को अंडर-15 राष्ट्रीय टूर्नामेंट के लिए चुना गया तो पहली बार उन्हें पूरी क्रिकेट किट मिली। इससे पहले वे सेकंड हैंड उपकरणों से खेलते थे क्योंकि उनके परिवार के पास पैसे नहीं थे।
इरफान ने बड़ौदा की अंडर-14, अंडर-15, अंडर-16 और अंडर-19 टीमों के लिए खेला। वे हमेशा अपनी उम्र के ग्रुप से छोटे रहते थे लेकिन उनकी प्रतिभा ने सबको प्रभावित किया।
2003 में पाकिस्तान में आयोजित अंडर-19 एशियाई ODI टूर्नामेंट में इरफान ने धमाल मचाया। उन्होंने 18 विकेट लिए जो औसत 7.38 थी। यह टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन था। बांग्लादेश के खिलाफ एक मैच में उन्होंने सिर्फ 16 रन देकर 9 विकेट लिए।
इस शानदार प्रदर्शन के बाद इरफान को इंडिया ए टीम में चुना गया। उन्होंने इंग्लैंड का दौरा किया और अच्छा प्रदर्शन किया। जल्द ही उन्हें राष्ट्रीय टीम के लिए चुन लिया गया।

2 अक्टूबर 2003 को इरफान पठान ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना ODI डेब्यू किया। यह मैच भारत, ऑस्ट्रेलिया और जिम्बाब्वे के बीच त्रिकोणीय श्रृंखला का हिस्सा था। इरफान केवल 19 साल के थे। डेब्यू में उन्हें कोई विकेट नहीं मिला लेकिन पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने 16 विकेट लिए।
जिम्बाब्वे के खिलाफ एक मैच में इरफान ने 24 रन देकर 4 विकेट लिए। इस प्रदर्शन के लिए उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया। यह उनका पहला मैन ऑफ द मैच अवार्ड था।
8 दिसंबर 2003 को एडिलेड में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इरफान ने अपना टेस्ट डेब्यू किया। यह मैच उनके लिए अच्छा नहीं रहा। उन्होंने 160 रन देकर केवल 1 विकेट लिया और बल्ले से केवल 1 रन बनाए।
लेकिन सिडनी में अगले मैच में इरफान ने कमाल कर दिया। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के महान विकेटकीपर एडम गिलक्राइस्ट को एक शानदार स्विंगिंग यॉर्कर से बोल्ड किया। यह विकेट यूट्यूब पर सबसे मशहूर विकेटों में से एक बन गया।
2004 में भारतीय टीम ने 15 साल बाद पाकिस्तान का दौरा किया। यह बहुत बड़ा दौरा था। इरफान पठान इस दौरे के सितारे बने। उन्होंने टेस्ट और ODI दोनों श्रृंखलाओं में शानदार प्रदर्शन किया।
इरफान ने छह मैचों में 20 विकेट लिए। उनकी स्विंग गेंदबाजी पाकिस्तानी बल्लेबाजों के लिए बहुत मुश्किल साबित हुई। भारत ने टेस्ट श्रृंखला 2-1 से और ODI श्रृंखला 3-2 से जीत ली।
इस प्रदर्शन के बाद इरफान को 2004 का ICC Emerging Player of the Year चुना गया। 19 साल की उम्र में यह बहुत बड़ी उपलब्धि थी। उन्हें भारत के नए कपिल देव के रूप में देखा जाने लगा।

जनवरी 2006 में पाकिस्तान में खेले गए एक टेस्ट मैच में इरफान पठान ने क्रिकेट इतिहास रच दिया। कराची में तीसरे टेस्ट में इरफान ने मैच के पहले ओवर में हैट्रिक ली।
उन्होंने लगातार तीन गेंदों पर सलमान बट, यूनिस खान और मोहम्मद यूसुफ को आउट किया। यह टेस्ट क्रिकेट इतिहास में पहली बार हुआ था कि किसी गेंदबाज़ ने मैच के पहले ओवर में हैट्रिक ली। आज तक इरफान इकलौते गेंदबाज़ हैं जिन्होंने यह कारनामा किया है।
इससे पहले के मैच में इरफान ने बल्ले से भी शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने एमएस धोनी के साथ 210 रन की पार्टनरशिप बनाई और भारत को फॉलो ऑन से बचाया।
2006 के अंत से 2007 के मध्य तक इरफान का फॉर्म खराब रहा। उन्हें टेस्ट और ODI दोनों टीमों से बाहर कर दिया गया। 2007 विश्व कप की टीम में तो वे थे लेकिन एक भी मैच नहीं खेल सके क्योंकि भारत पहले राउंड में ही बाहर हो गया।
लेकिन सितंबर 2007 में दक्षिण अफ्रीका में आयोजित पहले ICC T20 विश्व कप में इरफान ने कमाल की वापसी की। पूरे टूर्नामेंट में वे भारत के मुख्य गेंदबाजों में से एक थे।
24 सितंबर 2007 को जोहान्सबर्ग में फाइनल मैच खेला गया। भारत का मुकाबला पाकिस्तान से था। यह मैच बेहद रोमांचक था। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 157 रन बनाए।
पाकिस्तान की बल्लेबाजी में इरफान पठान ने कमाल कर दिया। उन्होंने केवल 16 रन देकर 3 विकेट लिए। उन्होंने इमरान नाजिर, उमर गुल और मिस्बाह-उल-हक जैसे महत्वपूर्ण बल्लेबाजों को आउट किया।
भारत ने मैच 5 रन से जीत लिया और पहला T20 विश्व कप अपने नाम किया। इरफान को फाइनल में मैन ऑफ द मैच चुना गया। यह उनके करियर का सबसे यादगार पल था।
भारतीय कोच ग्रेग चैपल ने इरफान को एक बेहतर बल्लेबाज़ बनाने पर काम किया। उन्होंने इरफान की बल्लेबाजी तकनीक को निखारा। धीरे-धीरे इरफान की बल्लेबाजी में सुधार होने लगा।
2005 में नागपुर में श्रीलंका के खिलाफ इरफान ने नंबर 3 पर बल्लेबाजी की। उन्होंने शानदार 83 रन बनाए। यह उनकी बल्लेबाजी क्षमता का प्रमाण था।
नवंबर 2007 में बैंगलोर में पाकिस्तान के खिलाफ इरफान ने अपना पहला और एकमात्र टेस्ट शतक बनाया। उन्होंने 102 रन बनाए। यह शतक उनके लिए बहुत खास था।
जनवरी 2008 में पर्थ में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत की ऐतिहासिक जीत में इरफान ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने 5 विकेट लिए और नंबर 3 पर 46 रन बनाए।
2006 के बाद इरफान की गेंदबाजी में तेज़ी और स्विंग दोनों कम होने लगे। उनकी स्पीड 140 किमी/घंटा से गिरकर 120-125 किमी/घंटा हो गई। स्विंग भी कम हो गया। इससे उनकी विकेट लेने की क्षमता पर असर पड़ा।
इरफान को बार-बार टीम से बाहर किया गया और वापस बुलाया गया। वे टीम में अपनी जगह पक्की नहीं कर पाए। चोटों ने भी उन्हें परेशान किया।
2012 में इरफान को श्रीलंका दौरे के लिए बुलाया गया। उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया और 5 विकेट हॉल भी लिया। लेकिन फिर वे घुटने की चोट से पीड़ित हो गए। 2013 में वे वापस आए लेकिन लगातार प्रदर्शन नहीं कर पाए।

2008 में IPL शुरू हुआ तो इरफान पठान को किंग्स XI पंजाब ने खरीदा। पहले तीन सीजन में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 47 विकेट लिए।
2011 में इरफान दिल्ली डेयरडेविल्स में चले गए। 2014 में सनराइजर्स हैदराबाद ने उन्हें खरीदा। IPL में इरफान ने कुल 86 मैच खेले और 80 विकेट लिए। उनकी बल्लेबाजी भी उपयोगी रही।
हालांकि IPL में भी इरफान लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए। उनकी चोटों और फॉर्म की समस्याओं ने उन्हें परेशान किया।
जनवरी 2020 में इरफान पठान ने सभी फॉर्मेट से संन्यास की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि वे क्रिकेट को अलविदा कहें। उनका आखिरी मैच 2012 में खेला गया था लेकिन औपचारिक रूप से 2020 में उन्होंने रिटायरमेंट ली।
इरफान का अंतरराष्ट्रीय करियर:

इरफान पठान की 2016 में सफा बेग से शादी हुई। सफा एक मॉडल हैं और जेद्दाह, सऊदी अरब से हैं। दोनों के दो बेटे हैं।
शादी से पहले इरफान का 10 साल तक शिवांगी देव के साथ रिश्ता था। शिवांगी ऑस्ट्रेलिया में रहती थीं। वे शादी करना चाहती थीं लेकिन इरफान चाहते थे कि पहले उनके बड़े भाई युसूफ की शादी हो। इस वजह से दोनों में मतभेद बढ़े और 2012 में ब्रेकअप हो गया।
इरफान अपने भाई युसूफ पठान के बहुत करीब हैं। दोनों भाइयों ने साथ मिलकर कठिनाइयों को पार किया। वे आज भी एक दूसरे के बहुत सपोर्ट हैं।
इरफान जम्मू में रहते हैं। उन्होंने जम्मू और कश्मीर को अपना घरेलू टीम चुना और राज्य की क्रिकेट को बढ़ावा देने में मदद की।

रिटायरमेंट के बाद इरफान पठान ने कमेंटेटर और क्रिकेट एनालिस्ट के रूप में काम करना शुरू किया। वे स्टार स्पोर्ट्स के लिए हिंदी और अंग्रेजी दोनों में कमेंट्री करते हैं। उनकी समझ और विश्लेषण को लोग बहुत पसंद करते हैं।
2022 में इरफान पठान को जम्मू और कश्मीर का रोड सेफ्टी ब्रांड अंबेसडर नियुक्त किया गया। वे सड़क सुरक्षा के बारे में जागरूकता फैलाते हैं।
2019 में इरफान पठान टीवी शो खतरों के खिलाड़ी सीजन 9 में हिस्सा लिया। यह शो रोहित शेट्टी होस्ट करते हैं। इरफान ने कई खतरनाक स्टंट किए और फाइनल तक पहुंचे। हालांकि वे शो नहीं जीत सके लेकिन उन्होंने अपनी हिम्मत दिखाई।
इरफान पठान की गेंदबाजी की मुख्य विशेषताएं:
इरफान की बल्लेबाजी की खासियतें:
इरफान एक अच्छे फील्डर भी थे। वे तेज़ दौड़ते थे और अच्छे कैच लेते थे। उनका थ्रो भी सटीक था।
इरफान पठान ने भारतीय क्रिकेट को एक प्रतिभाशाली ऑलराउंडर दिया। वे भारत के पहले असली तेज़ गेंदबाज़ ऑलराउंडर थे जो बल्ले और गेंद दोनों से टीम की मदद कर सकते थे।
इरफान की स्विंग गेंदबाजी ने भारतीय क्रिकेट में एक नया आयाम जोड़ा। उनकी तुलना वसीम अकरम से की जाती थी। युवा गेंदबाज़ों ने इरफान से बहुत कुछ सीखा।
2007 T20 विश्व कप जीतने में इरफान की भूमिका महत्वपूर्ण थी। इस जीत ने भारत में T20 क्रिकेट और IPL की नींव रखी।
जम्मू और कश्मीर के लिए खेलकर इरफान ने राज्य की क्रिकेट को बढ़ावा दिया। उन्होंने युवा खिलाड़ियों को प्रेरित किया।
इरफान का करियर चुनौतियों से भरा रहा। बहुत कम उम्र में सफलता मिलने के बाद उम्मीदें बहुत बढ़ गईं। जब उनकी गेंदबाजी में तेज़ी और स्विंग कम हुआ तो उन्हें बहुत आलोचना सहनी पड़ी।
चोटों ने भी इरफान को परेशान किया। घुटने की चोट ने उनके करियर को बहुत प्रभावित किया। वे कभी पूरी तरह फिट नहीं हो पाए।
इरफान को बार-बार टीम से बाहर किया गया। यह उनके लिए मानसिक रूप से बहुत कठिन था। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और वापसी की कोशिश करते रहे।
करियर के अंत में इरफान को अपनी जगह नहीं मिली। युवा खिलाड़ियों को मौका दिया गया। इससे इरफान निराश हुए लेकिन उन्होंने सम्मान के साथ संन्यास ली।
इरफान पठान की कहानी गरीबी से सफलता की प्रेरणादायक कहानी है। बड़ौदा की मस्जिद में रहने वाले मुअज्जिन के बेटे से भारतीय क्रिकेट का स्टार बनना आसान नहीं था। लेकिन इरफान और युसूफ दोनों भाइयों ने अपनी मेहनत से यह कर दिखाया।
इरफान युवाओं से कहते हैं कि परिस्थितियां कैसी भी हों, अपने सपने मत छोड़ो। उनका मानना है कि मेहनत और समर्पण से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
इरफान असफलताओं से सीखने की सलाह देते हैं। उनके करियर में कई उतार-चढ़ाव आए लेकिन उन्होंने हमेशा सकारात्मक रहने की कोशिश की।
इरफान अनुशासन और फिटनेस को बहुत महत्व देते हैं। वे कहते हैं कि फिटनेस किसी भी खिलाड़ी के लिए सबसे जरूरी है।
इरफान पठान भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रतिभाशाली ऑलराउंडरों में से एक थे। उन्होंने बहुत कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में धमाकेदार एंट्री ली और 2007 T20 विश्व कप जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। करांची में टेस्ट के पहले ओवर में हैट्रिक लेना एक ऐसा रिकॉर्ड है जो शायद कभी नहीं टूटेगा।
इरफान की कहानी बड़ौदा की मस्जिद से T20 विश्व कप के मैदान तक का अद्भुत सफर है। चोटों और फॉर्म की समस्याओं ने उनके करियर को प्रभावित किया लेकिन उन्होंने जो उपलब्धियां हासिल कीं वे हमेशा याद की जाएंगी।
आज इरफान एक सफल कमेंटेटर हैं और क्रिकेट से जुड़े हुए हैं। उनका नाम हमेशा भारतीय क्रिकेट के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा रहेगा। वे हर उस युवा के लिए प्रेरणा हैं जो गरीबी और संघर्ष के बावजूद अपने सपने पूरे करना चाहता है।
इरफान पठान भारतीय क्रिकेट के पूर्व ऑलराउंडर हैं जो 2007 T20 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य थे और टेस्ट के पहले ओवर में हैट्रिक लेने का रिकॉर्ड रखते हैं।
इरफान पठान का जन्म 27 अक्टूबर 1984 को गुजरात के बड़ौदा (वडोदरा) में हुआ था।
इरफान पठान ने 2 अक्टूबर 2003 को ODI में और 8 दिसंबर 2003 को टेस्ट में डेब्यू किया।
इरफान पठान की सबसे बड़ी उपलब्धियां 2007 T20 विश्व कप जीतना और टेस्ट के पहले ओवर में हैट्रिक लेना हैं।
इरफान पठान ने जनवरी 2006 में कराची में पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट के पहले ओवर में हैट्रिक ली।
इरफान पठान के बड़े भाई युसूफ पठान हैं जो भी भारतीय क्रिकेट टीम के लिए खेले।
2007 T20 विश्व कप फाइनल में इरफान ने 16 रन देकर 3 विकेट लिए और मैन ऑफ द मैच चुने गए।
इरफान पठान ने जनवरी 2020 में सभी फॉर्मेट से संन्यास की घोषणा की।
इरफान पठान की पत्नी सफा बेग हैं जो एक मॉडल हैं।
इरफान पठान को 2004 में ICC Emerging Player of the Year का पुरस्कार मिला।
इरफान पठान ने 29 टेस्ट मैच खेले और 100 विकेट लिए।
इरफान पठान ने नवंबर 2007 में बैंगलोर में पाकिस्तान के खिलाफ 102 रन का शतक बनाया।
इरफान पठान किंग्स XI पंजाब, दिल्ली डेयरडेविल्स और सनराइजर्स हैदराबाद के लिए IPL में खेले।
इरफान पठान अब क्रिकेट कमेंटेटर और एनालिस्ट हैं।
इरफान पठान बाएं हाथ के तेज़ मध्यम गेंदबाज़ थे जो स्विंग गेंदबाजी में माहिर थे।
इरफान पठान ने 120 ODI मैचों में 173 विकेट लिए।
इरफान पठान बड़ौदा और बाद में जम्मू और कश्मीर के लिए घरेलू क्रिकेट खेले।
इरफान ने 2003 में सिडनी टेस्ट में एडम गिलक्राइस्ट को शानदार स्विंगिंग यॉर्कर से बोल्ड किया।
हां, इरफान पठान 2019 में खतरों के खिलाड़ी सीजन 9 में हिस्सा लिया और फाइनल तक पहुंचे।
इरफान पठान को 2007 T20 विश्व कप जीतने, टेस्ट के पहले ओवर में हैट्रिक, स्विंग गेंदबाजी और गरीबी से सफलता की प्रेरक कहानी के लिए याद किया जाता है।