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भारतीय खेल जगत में एमसी मैरी कॉम का नाम किंवदंती है। दरअसल, मणिपुर के कागाथेई गांव से निकली यह बेटी 6 बार विश्व चैंपियन बनकर इतिहास रच चुकी है। हालांकि, उनकी यात्रा कोई परीकथा नहीं बल्कि संघर्ष, त्याग और अदम्य इच्छाशक्ति की सच्ची कहानी है। फिर भी, 2012 लंदन ओलिंपिक में कांस्य पदक जीतकर पहली भारतीय महिला मुक्केबाज बनीं जिसने ओलिंपिक में पदक हासिल किया। वास्तव में, झूम खेती करने वाले गरीब परिवार से होने के बावजूद आज वे पद्म विभूषण (भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान) से सम्मानित हैं। साथ ही, राज्यसभा सदस्य भी रह चुकी हैं। इसलिए, उन्हें “मैगनिफिसेंट मैरी” कहा जाता है।
इसके अलावा, मैरी कॉम की कहानी सिर्फ मुक्केबाजी तक सीमित नहीं है। दरअसल, माँ बनने के बाद भी उन्होंने मुक्केबाजी नहीं छोड़ी। हालांकि, 2007 में जुड़वां बच्चों और 2013 में तीसरे बेटे के जन्म के बाद भी रिंग में वापसी की। फिर भी, 2024 में 40 साल की उम्र सीमा के कारण सेवानिवृत्ति लेनी पड़ी। वास्तव में, 2023 में तलाक और आर्थिक संघर्ष ने उन्हें तोड़ दिया। साथ ही, चार बच्चों की जिम्मेदारी अकेले संभाल रही हैं। दरअसल, उनकी जीवनी हर उस महिला के लिए प्रेरणा है जो परिस्थितियों से लड़कर अपना मुकाम हासिल करना चाहती है। इसलिए, मैरी कॉम की कहानी अमर रहेगी!
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पूरा नाम | मांग्ते चुंगनेइजांग मैरी कॉम |
| उपनाम | मैगनिफिसेंट मैरी, एमसी मैरी कॉम |
| जन्म तिथि | 24 नवंबर 1982 (कुछ स्रोतों में 1 मार्च 1983) |
| जन्म स्थान | कागाथेई गांव, चुराचांदपुर जिला, मणिपुर, भारत |
| उम्र | 43 वर्ष (जनवरी 2026 तक) |
| ऊंचाई | 5 फीट 1 इंच (155 सेमी) |
| वजन | 48-51 किलो (फ्लाईवेट वर्ग) |
| खेल | मुक्केबाजी (बॉक्सिंग) |
| वजन वर्ग | लाइट फ्लाईवेट (48 किग्रा), फ्लाईवेट (51 किग्रा) |
| पिता का नाम | मांग्ते टोंपा कॉम (किरायेदार किसान) |
| माता का नाम | मांग्ते आखम कॉम (किरायेदार किसान) |
| भाई-बहन | सबसे बड़ी संतान, एक छोटी बहन और एक भाई |
| धर्म | ईसाई (बैपटिस्ट परिवार) |
| जाति | कॉम जनजाति |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| वैवाहिक स्थिति | तलाकशुदा (2023 में तलाक) |
| पूर्व पति का नाम | करुंग ओंखोलेर (ओनलर) कॉम (फुटबॉलर, विवाह 2005-2023) |
| संतान | तीन बेटे – रेचुंगवार और खुपनेइवार (जुड़वां, 2007), तीसरा बेटा (2013), गोद ली हुई बेटी मेरिलिन (2018) |
| मुक्केबाजी की शुरुआत | 2000 (15 साल की उम्र में) |
| पहला कोच | के. कोसाना मेइतेई (इम्फाल) |
| प्रमुख कोच | एम. नरजित सिंह (मणिपुर राज्य मुक्केबाजी कोच) |
| अंतरराष्ट्रीय पदार्पण | 2001 (पहली विश्व चैंपियनशिप, अमेरिका – रजत पदक) |
| ओलिंपिक | 2012 लंदन (कांस्य), 2020 टोक्यो |
| सेवानिवृत्ति | 2024 (40 साल की आयु सीमा के कारण) |
| प्रमुख उपलब्धि | 6 बार विश्व चैंपियन, ओलिंपिक कांस्य पदक, एशियाई खेल स्वर्ण, राष्ट्रमंडल खेल स्वर्ण |
| विशेष रिकॉर्ड | विश्व चैंपियनशिप में 8 पदक जीतने वाली इकलौती मुक्केबाज |
| शिक्षा | लोकतक क्रिश्चियन मॉडल हाई स्कूल, सेंट जेवियर कैथोलिक स्कूल, इम्फाल |
| राजनीतिक पद | राज्यसभा सदस्य (2016-2022) |
| सम्मान | पद्म विभूषण (2020), पद्म भूषण (2013), पद्म श्री (2006), अर्जुन पुरस्कार (2003), राजीव गांधी खेल रत्न (2009) |
| फिल्म | “मैरी कॉम” (2014) – प्रियंका चोपड़ा ने मुख्य भूमिका निभाई |
| आत्मकथा | “अनब्रेकेबल” (2013, हार्परकॉलिन्स) |
| मुक्केबाजी अकादमी | मैरी कॉम बॉक्सिंग एकेडमी, इम्फाल, मणिपुर (2006 से) |
| वर्तमान निवास | फरीदाबाद, हरियाणा |
| अनुमानित संपत्ति | लगभग 35-40 करोड़ रुपये (हालांकि 2023 तलाक के बाद आर्थिक संकट) |

मैरी कॉम का जन्म 24 नवंबर 1982 (कुछ स्रोतों में 1 मार्च 1983) को मणिपुर के चुराचांदपुर जिले के कागाथेई गांव में हुआ। दरअसल, उनका असली नाम मांग्ते चुंगनेइजांग था। हालांकि, स्थानीय भाषा में इसका अर्थ “समृद्ध” होता है। फिर भी, विडंबना यह थी कि परिवार बहुत गरीब था। वास्तव में, माता-पिता मांग्ते टोंपा कॉम और मांग्ते आखम कॉम झूम खेती (पहाड़ी खेती) में किरायेदार मजदूर थे। साथ ही, परिवार इतना गरीब था कि दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करना पड़ता था। इसलिए, मैरी को बचपन से ही खेतों में काम करना पड़ता था।
इसके अलावा, मैरी तीन संतानों में सबसे बड़ी थीं। दरअसल, एक छोटी बहन और एक भाई थे। हालांकि, परिवार कॉम जनजाति से था और ईसाई बैपटिस्ट धर्म को मानता था। फिर भी, बचपन में खेल के प्रति रुचि थी। वास्तव में, पिता अपने युवा दिनों में कुश्ती के शौकीन थे। साथ ही, मैरी को भी खेलों से प्यार था। दरअसल, स्कूल में वॉलीबॉल, फुटबॉल और एथलेटिक्स खेलती थीं। इसलिए, खेल का माहौल पहले से मौजूद था।
इसके अतिरिक्त, मैरी ने लोकतक क्रिश्चियन मॉडल हाई स्कूल, मोइरांग से छठीं कक्षा तक पढ़ाई की। दरअसल, फिर सेंट जेवियर कैथोलिक स्कूल, मोइरांग में आठवीं तक पढ़ीं। हालांकि, परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पढ़ाई में रुकावटें आती रहीं। फिर भी, इसी दौरान एथलेटिक्स में भाला फेंक और 400 मीटर दौड़ में हिस्सा लेती थीं। वास्तव में, बाद में नौवीं और दसवीं के लिए अदिमजाती हाई स्कूल, इम्फाल में दाखिला लिया। साथ ही, लेकिन मैट्रिक परीक्षा पास नहीं कर पाईं। दरअसल, बाद में राष्ट्रीय ओपन स्कूलिंग से पढ़ाई पूरी की। इसलिए, शिक्षा का सफर बहुत कठिन रहा।

1998 में एक घटना ने मैरी का जीवन बदल दिया। दरअसल, मणिपुर के मुक्केबाज डिंको सिंह ने बैंकॉक एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता। हालांकि, यह खबर पूरे मणिपुर में आग की तरह फैल गई। फिर भी, मैरी ने टेलीविजन पर डिंको सिंह का प्रदर्शन देखा। वास्तव में, उसी पल तय कर लिया कि मुक्केबाजी करेंगी। साथ ही, मैरी ने बाद में कहा, “डिंको भाई ने हम सभी को प्रेरणा दी। मैंने सोचा कि अगर एक मणिपुरी लड़का कर सकता है, तो मैं भी कर सकती हूं।” इसलिए, यह उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट था।
इसके अलावा, 15 साल की उम्र में 2000 में मैरी ने मुक्केबाजी की ट्रेनिंग शुरू की। दरअसल, इम्फाल जाकर कोच के. कोसाना मेइतेई से विनती की कि उन्हें सिखाएं। हालांकि, शुरुआत बहुत मुश्किल थी। फिर भी, सबसे बड़ी समस्या पिता को बताना थी। वास्तव में, मैरी ने अपनी मुक्केबाजी की रुचि पिता से छुपाई। साथ ही, पिता को डर था कि मुक्केबाजी से बेटी के चेहरे पर चोट लगेगी और शादी में दिक्कत होगी। दरअसल, उस समय मणिपुर में लड़कियों के लिए मुक्केबाजी असामान्य थी। इसलिए, मैरी चुपचाप ट्रेनिंग लेती रहीं।
इसके अतिरिक्त, बाद में मणिपुर राज्य मुक्केबाजी कोच एम. नरजित सिंह के तहत प्रशिक्षण लिया। दरअसल, नरजित सिंह ने उनमें अपार संभावनाएं देखीं। हालांकि, कोच ने बीबीसी को बताया, “मैरी बहुत मेहनती और दृढ़ इच्छाशक्ति वाली लड़की थीं। उन्होंने मुक्केबाजी की मूल बातें बहुत जल्दी सीखीं।” फिर भी, रात-रात भर प्रैक्टिस करती थीं। वास्तव में, जब दूसरे जा चुके होते, तब भी मैरी जिम में रहतीं। इसलिए, कोच बहुत प्रभावित हुए।
इसके अलावा, 2000 में मैरी ने मणिपुर राज्य महिला मुक्केबाजी चैंपियनशिप जीत ली। दरअसल, उनकी तस्वीर अखबार में छपी। हालांकि, पिता ने अखबार में तस्वीर देखकर सब जान लिया। फिर भी, पहले बहुत गुस्सा हुए। वास्तव में, मैरी से कहा कि या तो घर चुनो या मुक्केबाजी। साथ ही, मैरी ने मुक्केबाजी को चुना। दरअसल, घर छोड़कर इम्फाल स्पोर्ट्स एकेडमी में रहने लगीं। इसलिए, यह फैसला बहुत मुश्किल था। हालांकि, 2002 में विश्व चैंपियनशिप जीतने के बाद पिता ने उन्हें माफ कर दिया। फिर भी, टेलीविजन पर बेटी को देखकर गर्व महसूस किया। वास्तव में, पिता ने माफी मांगी और कहा, “मुझे तुम्हारी समझ नहीं थी। तुमने मुझे गलत साबित कर दिया।” इसलिए, यह बहुत भावुक पल था।
2001 में मैरी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण किया। दरअसल, यह पहली महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप थी जो अमेरिका के स्क्रैंटन, पेंसिल्वेनिया में हुई। हालांकि, सिर्फ 18 साल की उम्र में 48 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीता। फिर भी, यह बहुत बड़ी उपलब्धि थी। वास्तव में, भारतीय महिला मुक्केबाजी के लिए यह ऐतिहासिक पल था। साथ ही, मैरी ने सबको चौंका दिया। इसलिए, भारत में उनका नाम होने लगा।
इसके अलावा, 2002 में तुर्की के अंत्या में दूसरी विश्व चैंपियनशिप हुई। दरअसल, मैरी ने 45 किग्रा वर्ग में भाग लिया। हालांकि, फाइनल में पहुंचीं और स्वर्ण पदक जीत लिया। फिर भी, यह भारत की पहली विश्व चैंपियनशिप स्वर्ण थी महिला मुक्केबाजी में। वास्तव में, मैरी ने बाद में कहा, “मैं विश्वास नहीं कर पा रही थी। मैंने अपने गांव, अपने परिवार, अपने मणिपुर को गौरवान्वित किया।” साथ ही, राष्ट्रगान सुनकर आंसू नहीं रुक रहे थे। इसलिए, यह उनके करियर का पहला शिखर था।

इसके अतिरिक्त, मैरी ने अगले कुछ सालों में अपना दबदबा बनाए रखा। दरअसल, उनकी उपलब्धियां:
वास्तव में, लगातार पांच विश्व चैंपियनशिप जीतना अविश्वसनीय था। साथ ही, 2008 में अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ ने उन्हें “मैगनिफिसेंट मैरी” की उपाधि दी। इसलिए, दुनिया भर में उनकी पहचान बन गई।

2001 में राष्ट्रीय खेलों के दौरान मैरी की मुलाकात करुंग ओंखोलेर (ओनलर) कॉम से हुई। दरअसल, ओनलर दिल्ली विश्वविद्यालय में कानून के छात्र और फुटबॉल खिलाड़ी थे। हालांकि, ओनलर ने मैरी की मदद की जब वे दिल्ली में मुक्केबाजी मैच के लिए जा रही थीं। फिर भी, धीरे-धीरे दोनों के बीच दोस्ती गहरी होती गई। वास्तव में, चार साल की प्रेम कहानी के बाद 2005 में दोनों ने शादी कर ली। साथ ही, ओनलर ने वादा किया कि वे कभी मैरी को मुक्केबाजी छोड़ने के लिए नहीं कहेंगे। इसलिए, यह बहुत आदर्श जोड़ी थी।
इसके अलावा, 2006 विश्व चैंपियनशिप जीतने के बाद मैरी गर्भवती हुईं। दरअसल, 2007 में जुड़वां बेटों रेचुंगवार और खुपनेइवार को जन्म दिया। हालांकि, मुक्केबाजी से ब्रेक लेना पड़ा। फिर भी, हर कोई सोचता था कि अब मैरी वापस नहीं आएंगी। वास्तव में, लेकिन मैरी ने सबको गलत साबित किया। साथ ही, बच्चों को संभालते हुए फिर से ट्रेनिंग शुरू की। दरअसल, ओनलर घर पर बच्चों की देखभाल करते और मैरी जिम जाती थीं। इसलिए, यह असामान्य व्यवस्था थी लेकिन काम करी।

इसके अतिरिक्त, माँ बनने के सिर्फ एक साल बाद 2008 में एशियाई महिला मुक्केबाजी चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। दरअसल, फिर चीन में विश्व चैंपियनशिप में चौथा स्वर्ण पदक हासिल किया। हालांकि, यह अविश्वसनीय था। फिर भी, दुनिया ने देखा कि मातृत्व कोई बाधा नहीं है। वास्तव में, मैरी ने कहा, “मेरे बच्चे मेरी ताकत हैं। मैं उनके लिए और भारत के लिए लड़ती हूं।” साथ ही, ओनलर का साथ बहुत महत्वपूर्ण था। इसलिए, यह खेल इतिहास में महिला सशक्तिकरण का उदाहरण बन गया।
2012 में पहली बार महिला मुक्केबाजी को ओलिंपिक में शामिल किया गया। दरअसल, मैरी के लिए यह सुनहरा मौका था। हालांकि, एक बड़ी समस्या थी। फिर भी, ओलिंपिक में 51 किग्रा (फ्लाईवेट) वर्ग था। वास्तव में, मैरी हमेशा 46-48 किग्रा में लड़ती थीं। साथ ही, वजन बढ़ाना मुश्किल था। दरअसल, लेकिन मैरी ने वजन बढ़ाया और क्वालीफाई किया। इसलिए, वे एकमात्र भारतीय महिला मुक्केबाज थीं जिन्होंने लंदन ओलिंपिक के लिए क्वालीफाई किया।
इसके अलावा, पहले राउंड में पोलैंड की करोलिना मिचाल्कज़ुक को 19-14 से हराया। दरअसल, मिचाल्कज़ुक शारीरिक रूप से बड़ी थीं। हालांकि, मैरी ने अपनी तकनीक और गति से जीत हासिल की। फिर भी, क्वार्टर फाइनल में ट्यूनीशिया की मरौआ रहाली को 15-6 से हराया। वास्तव में, सेमीफाइनल में ब्रिटेन की निकोला एडम्स से हार गईं। साथ ही, एडम्स बाद में स्वर्ण पदक विजेता बनीं। दरअसल, मुक्केबाजी में दोनों हारने वाली सेमीफाइनलिस्ट को कांस्य मिलता है। इसलिए, मैरी ने कांस्य पदक जीत लिया।
इसके अतिरिक्त, यह भारत का दूसरा ओलिंपिक मुक्केबाजी पदक था। दरअसल, 2008 में विजेंदर सिंह ने कांस्य जीता था। हालांकि, मैरी पहली भारतीय महिला मुक्केबाज बनीं। फिर भी, केवल तीन भारतीय महिलाएं (कर्णम मल्लेश्वरी 2000 में भारोत्तोलन, साइना नेहवाल 2012 में बैडमिंटन) ओलिंपिक पदक जीत चुकी थीं। वास्तव में, मैरी ने कहा, “यह मेरे जीवन का सबसे बड़ा पल है। मैंने भारत के लिए ओलिंपिक पदक जीता।” साथ ही, तिरंगा लहराते और राष्ट्रगान सुनते हुए रो पड़ीं। इसलिए, यह भारतीय खेलों का स्वर्णिम क्षण था।
ओलिंपिक के बाद भी मैरी नहीं रुकीं। दरअसल, 2013 में तीसरे बेटे को जन्म दिया। हालांकि, फिर से मुक्केबाजी में लौटीं। फिर भी, उनकी उपलब्धियां:
वास्तव में, छठी विश्व चैंपियनशिप जीतना इतिहास था। साथ ही, कोई भी महिला मुक्केबाज 6 बार विश्व चैंपियन नहीं बनी थी। दरअसल, मणिपुर सरकार ने उन्हें “मीथोइलेइमा” (महान महिला) की उपाधि दी। इसलिए, मैरी अब किंवदंती बन चुकी थीं।
इसके अलावा, 2018 में मैरी और ओनलर ने मेरिलिन नाम की एक बेटी को गोद लिया। दरअसल, उनकी तीन बेटों के बाद अब एक बेटी भी थी। हालांकि, मैरी ने कहा, “हमें बेटी की कमी महसूस हो रही थी। मेरिलिन हमारी छोटी राजकुमारी है।” फिर भी, चार बच्चों को संभालना और मुक्केबाजी जारी रखना आसान नहीं था। वास्तव में, लेकिन मैरी ने दोनों किया। इसलिए, वे सुपरवुमन थीं।
2020 टोक्यो ओलिंपिक (2021 में आयोजित) के लिए मैरी ने क्वालीफाई किया। दरअसल, 38 साल की उम्र में यह उनका दूसरा ओलिंपिक था। हालांकि, प्री-क्वार्टर फाइनल में कोलंबिया की इंग्रिड वैलेंसिया से हार गईं। फिर भी, मैरी ने बहुत अच्छी लड़ाई लड़ी। वास्तव में, यह उनका आखिरी ओलिंपिक था। साथ ही, बाद में कहा, “मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया। मुझे पछतावा नहीं है।” इसलिए, सम्मान के साथ हार स्वीकार की।

2024 में अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ ने नया नियम बनाया कि मुक्केबाज 40 साल की उम्र तक ही प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं। दरअसल, मैरी 2024 में 42 साल की हो गईं (या 41, जन्म तिथि के आधार पर)। हालांकि, नियम के अनुसार उन्हें सेवानिवृत्त होना पड़ा। फिर भी, मैरी ने कहा, “मुझमें अभी भी भूख है लेकिन दुर्भाग्य से आयु सीमा के कारण खत्म हो गया। मैं और खेलना चाहती हूं लेकिन मुझे छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है।” वास्तव में, यह बहुत दुखद था। साथ ही, मैरी अभी भी फिट थीं। दरअसल, लेकिन नियम नियम है। इसलिए, 2024 में आधिकारिक तौर पर सेवानिवृत्त हो गईं।
2023 में मैरी और ओनलर ने 18 साल की शादी के बाद तलाक ले लिया। दरअसल, यह खबर सबको चौंकाने वाली थी। हालांकि, दिसंबर 2023 में पारंपरिक रीति से तलाक हुआ। फिर भी, मैरी ने जनवरी 2026 में पहली बार सार्वजनिक रूप से इस बारे में बात की। वास्तव में, उन्होंने पीटीआई को साक्षात्कार में कहा, “लोग मुझे लालची कह रहे हैं जो कुछ नहीं जानते। हां, मैं अपने पति ओनलर से अलग हो गई और यह दो साल पहले हुआ।” साथ ही, मैरी ने बताया कि जब तक वे प्रतिस्पर्धा कर रही थीं, सब ठीक था। दरअसल, लेकिन 2022 राष्ट्रमंडल खेलों से पहले चोट लगी और बिस्तर पर पड़ी रहीं। इसलिए, तब पता चला कि ओनलर ने वित्तीय गड़बड़ी की थी।
इसके अलावा, मैरी ने आरोप लगाया कि ओनलर ने 2022 मणिपुर चुनाव में लड़ने के लिए 2-3 करोड़ रुपये खर्च किए। दरअसल, ओनलर चुनाव हार गए। हालांकि, मैरी ने कहा कि उन्होंने ओनलर को चुनाव लड़ने के लिए नहीं कहा। फिर भी, पैसे उनकी कमाई से गए। वास्तव में, मैरी ने कहा, “मैं बिस्तर पर पड़ी थी, मुझे वॉकर की जरूरत थी। तब मुझे एहसास हुआ कि जिस आदमी पर मैंने भरोसा किया वह वैसा नहीं था।” साथ ही, मैरी ने बताया कि उन्होंने कई बार मामले को सुलझाने की कोशिश की। दरअसल, लेकिन जब कुछ नहीं हुआ तो तलाक ले लिया। इसलिए, यह बहुत दर्दनाक था।
इसके अतिरिक्त, मैरी ने मीडिया में अपनी बदनामी पर दुख जताया। दरअसल, कुछ खबरों में उन्हें लालची बताया गया। हालांकि, मैरी ने कहा, “जो बातें मेरे और उनके बीच थीं, वे अखबारों को दी जा रही हैं ताकि मुझे खलनायक बनाया जा सके। मेरे चरित्र पर सवाल उठाए जा रहे हैं। मेरी उपलब्धियों का क्या मतलब? क्या फायदा, मैं टूट गई हूं लेकिन मैं दुख मनाने का भी समय नहीं दे सकती। क्योंकि मुझे चार बच्चों का ध्यान रखना है, माता-पिता हैं जो मुझ पर निर्भर हैं।” फिर भी, मैरी ने कहा कि वे पुलिस में शिकायत नहीं करना चाहतीं। वास्तव में, बस सबको उन्हें अकेला छोड़ देना चाहिए। साथ ही, ओनलर ने सभी आरोपों से इनकार किया है। दरअसल, विवाद अभी चल रहा है। इसलिए, मैरी बहुत मुश्किल दौर से गुजर रही हैं।
इसके अलावा, वर्तमान में मैरी फरीदाबाद, हरियाणा में चारों बच्चों के साथ रह रही हैं। दरअसल, तीन बेटे और एक बेटी सब बोर्डिंग स्कूल में हैं। हालांकि, उनका पूरा खर्च मैरी उठा रही हैं। फिर भी, मैरी ने कहा, “मैं अपने बच्चों के लिए कड़ी मेहनत करती हूं। भगवान जानता है कि कितना मुश्किल रहा लेकिन क्या आप नीचे रह सकते हैं जब बच्चे हों?” वास्तव में, अब मैरी विज्ञापनों और व्यावसायिक उपस्थिति से अपना वित्त फिर से बना रही हैं। साथ ही, भारतीय ओलिंपिक संघ की एथलीट आयोग की प्रमुख हैं। इसलिए, धीरे-धीरे स्थिति सुधर रही है।
2006 में मैरी ने इम्फाल, मणिपुर में मैरी कॉम बॉक्सिंग एकेडमी की स्थापना की। दरअसल, यह एकेडमी गरीब युवाओं को मुफ्त प्रशिक्षण देती है। हालांकि, संसाधन सीमित हैं। फिर भी, कई युवा लड़के और लड़कियां यहां प्रशिक्षण लेते हैं। वास्तव में, मैरी ने कहा, “मैं चाहती हूं कि मणिपुर से और मुक्केबाज आएं। मैं उन्हें मुफ्त में सिखाती हूं क्योंकि मुझे भी संघर्ष करना पड़ा था।” साथ ही, कई राष्ट्रीय स्तर के मुक्केबाज यहां से निकले हैं। इसलिए, यह उनकी विरासत का हिस्सा है।
26 अप्रैल 2016 को भारत के राष्ट्रपति ने मैरी को राज्यसभा (संसद का उच्च सदन) के लिए मनोनीत किया। दरअसल, यह बहुत सम्मान की बात थी। हालांकि, मैरी ने 2022 तक राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्य किया। फिर भी, उन्होंने खेल और युवा मामलों पर ध्यान दिया। वास्तव में, महिला सशक्तिकरण और मणिपुर के विकास के लिए आवाज उठाई। साथ ही, 2017 में युवा मामले और खेल मंत्रालय ने उन्हें मुक्केबाजी के लिए राष्ट्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया। इसलिए, खेल प्रशासन में भी योगदान दिया।
मैरी कॉम को असंख्य सम्मान मिले हैं:
| वर्ष | सम्मान/पुरस्कार |
|---|---|
| 2003 | अर्जुन पुरस्कार |
| 2006 | पद्म श्री (भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान) |
| 2007 | लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स – पीपल ऑफ द ईयर |
| 2008 | रीयल हीरोज अवॉर्ड (सीएनएन-आईबीएन और रिलायंस) |
| 2008 | पेप्सी एमटीवी यूथ आइकन (एमटीवी इंडिया) |
| 2008 | अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ द्वारा “मैगनिफिसेंट मैरी” उपाधि |
| 2009 | राजीव गांधी खेल रत्न (भारत का सर्वोच्च खेल सम्मान) |
| 2010 | सहारा स्पोर्ट्स अवॉर्ड्स – स्पोर्ट्सवुमन ऑफ द ईयर |
| 2013 | पद्म भूषण (भारत का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान) |
| 2016 | मानद डॉक्टरेट (नॉर्थ-ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी) |
| 2018 | मणिपुर सरकार द्वारा “मीथोइलेइमा” (महान महिला) उपाधि |
| 2019 | मानद डॉक्टरेट (काजीरंगा यूनिवर्सिटी) |
| 2020 | पद्म विभूषण (भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान) |
इसके अलावा, मैरी को राजस्थान और मणिपुर सरकारों ने ओलिंपिक पदक के लिए 50-50 लाख रुपये दिए। दरअसल, मणिपुर सरकार ने दो एकड़ जमीन भी दी। हालांकि, इम्फाल में राष्ट्रीय खेल गांव की ओर जाने वाली सड़क को एमसी मैरी कॉम रोड नाम दिया गया। फिर भी, सबसे बड़ा सम्मान पद्म विभूषण है। वास्तव में, खेल क्षेत्र से बहुत कम लोगों को यह सम्मान मिलता है। साथ ही, मैरी इसकी हकदार हैं। इसलिए, भारत उन पर गर्व करता है।

5 सितंबर 2014 को मैरी के जीवन पर आधारित हिंदी फिल्म “मैरी कॉम” रिलीज हुई। दरअसल, निर्देशक ओमुंग कुमार ने यह फिल्म बनाई। हालांकि, प्रियंका चोपड़ा ने मुख्य भूमिका निभाई। फिर भी, फिल्म को आलोचनात्मक और व्यावसायिक सफलता मिली। वास्तव में, प्रियंका को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। साथ ही, दर्शन कुमार ने ओनलर की भूमिका निभाई। दरअसल, फिल्म ने मैरी की कहानी को पूरे भारत में पहुंचाया। इसलिए, लाखों लोगों ने उनके संघर्ष को देखा।
इसके अलावा, 2013 में मैरी ने अपनी आत्मकथा “अनब्रेकेबल” (सह-लेखक: दीना सेर्तो) हार्परकॉलिन्स से प्रकाशित की। दरअसल, इस पुस्तक में उनके जीवन की पूरी कहानी है। हालांकि, तमिलनाडु की 11वीं कक्षा की अंग्रेजी पाठ्यपुस्तक में इसका एक अंश शामिल किया गया। फिर भी, यह बच्चों के लिए प्रेरणा है। इसलिए, मैरी की विरासत किताबों और फिल्मों में भी जिंदा है।
मैरी कॉम के नाम अनगिनत रिकॉर्ड हैं:
| रिकॉर्ड/उपलब्धि | विवरण |
|---|---|
| 6 बार विश्व चैंपियन | 2002, 2005, 2006, 2008, 2010, 2018 (एकमात्र महिला) |
| 8 विश्व चैंपियनशिप पदक | 6 स्वर्ण + 1 रजत (2001) + 1 कांस्य (2019) = एकमात्र मुक्केबाज (पुरुष या महिला) |
| ओलिंपिक पदक | कांस्य (2012 लंदन) – पहली भारतीय महिला मुक्केबाज |
| एशियाई खेल स्वर्ण | 2014 (इंचियॉन) – पहली भारतीय महिला मुक्केबाज |
| राष्ट्रमंडल खेल स्वर्ण | 2018 (गोल्ड कोस्ट) – पहली भारतीय महिला मुक्केबाज |
| 5 बार एशियाई चैंपियन | 2003, 2005, 2008, 2010, 2012 |
| पहली सात विश्व चैंपियनशिप में पदक | एकमात्र महिला मुक्केबाज |
| माँ बनने के बाद विश्व चैंपियन | 2008, 2010, 2018 (तीन बेटे और एक बेटी के बाद) |
| सबसे उम्रदराज विश्व चैंपियन | 2018 (35-36 साल की उम्र में छठा स्वर्ण) |
| पद्म विभूषण | पहली महिला खिलाड़ी (2020) |
| राज्यसभा सदस्य | 2016-2022 |
मैरी कॉम की कहानी केवल मुक्केबाजी की कहानी नहीं है। दरअसल, यह गरीबी, लैंगिक भेदभाव और सामाजिक बाधाओं के खिलाफ लड़ाई की कहानी है। हालांकि, मणिपुर के एक झूम खेती करने वाले परिवार से निकलकर 6 बार विश्व चैंपियन बनना और ओलिंपिक पदक जीतना असाधारण है। फिर भी, सबसे प्रेरणादायक बात यह है कि माँ बनने के बाद भी उन्होंने नहीं छोड़ा। वास्तव में, तीन बेटे और एक बेटी को संभालते हुए दुनिया में भारत का नाम रोशन किया। साथ ही, पद्म विभूषण से सम्मानित होना उनकी महानता का प्रमाण है। इसलिए, मैरी कॉम हर भारतीय के लिए गर्व की बात हैं।
इसके अलावा, 2023 में तलाक और आर्थिक संकट ने उन्हें तोड़ा। दरअसल, 18 साल की शादी के बाद अलग होना और चार बच्चों की जिम्मेदारी अकेले संभालना आसान नहीं है। हालांकि, मैरी ने फिर से साबित किया कि वे अटूट हैं। फिर भी, वे फिर से उठ रही हैं। वास्तव में, उनकी आत्मकथा का नाम “अनब्रेकेबल” सही है। साथ ही, मैरी ने मैरी कॉम बॉक्सिंग एकेडमी के जरिए युवा पीढ़ी को प्रशिक्षित कर रही हैं। दरअसल, उन्होंने महिला मुक्केबाजी को भारत में मुख्यधारा में लाया। इसलिए, आज सैकड़ों लड़कियां उनसे प्रेरित होकर मुक्केबाजी कर रही हैं। वास्तव में, मैरी कॉम की कहानी अमर रहेगी और पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी!
43 वर्ष (जनवरी 2026 तक)। दरअसल, जन्म 24 नवंबर 1982 को हुआ।
6 बार (2002, 2005, 2006, 2008, 2010, 2018)। वास्तव में, यह विश्व रिकॉर्ड है।
कांस्य पदक (लंदन)। साथ ही, पहली भारतीय महिला मुक्केबाज जिसने ओलिंपिक पदक जीता।
मांग्ते चुंगनेइजांग। दरअसल, मुक्केबाजी में “मैरी” नाम उच्चारण के लिए आसान था।
2000 में, 15 साल की उम्र में। हालांकि, डिंको सिंह से प्रेरित होकर।
चार – तीन बेटे और एक गोद ली हुई बेटी। दरअसल, जुड़वां (2007), तीसरा बेटा (2013), मेरिलिन (2018)।
करुंग ओंखोलेर (ओनलर) कॉम। हालांकि, 2023 में तलाक हो गया।
2024 में, 40 साल की आयु सीमा के कारण। फिर भी, खेलना चाहती थीं।
पद्म विभूषण (2020)। वास्तव में, भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान।
5 सितंबर 2014। साथ ही, प्रियंका चोपड़ा ने मुख्य भूमिका निभाई।
इम्फाल, मणिपुर। दरअसल, 2006 से गरीब बच्चों को मुफ्त प्रशिक्षण।
2016-2022। हालांकि, भारत के राष्ट्रपति ने मनोनीत किया था।
2008 में। वास्तव में, अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ द्वारा।
2014 इंचियॉन। दरअसल, पहली भारतीय महिला मुक्केबाज।
फरीदाबाद, हरियाणा। साथ ही, चारों बच्चों के साथ अकेले रह रही हैं।