Narendra Modi की जीवनी – Narendra Modi Biography in Hindi

भारतीय राजनीति में नरेंद्र दामोदरदास मोदी का नाम एक ऐसी घटना है जिसने देश की दिशा बदल दी। दरअसल, गुजरात के छोटे से कस्बे वडनगर में चाय बेचने वाला लड़का आज दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेताओं में से एक है। हालांकि, उनका सफर किसी परीकथा से कम नहीं है। फिर भी, संघर्ष, त्याग और अथक मेहनत ने उन्हें भारत का 14वां प्रधानमंत्री बनाया। वास्तव में, 2014 में पहली बार, 2019 में दूसरी बार और 2024 में तीसरी बार लगातार प्रधानमंत्री बनना उनकी लोकप्रियता का प्रमाण है। साथ ही, 27 से अधिक अंतरराष्ट्रीय सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्राप्त कर वे भारत के सबसे सम्मानित नेता बने हैं। इसलिए, उन्हें आजादी के बाद जन्म लेने वाला पहला प्रधानमंत्री होने का गौरव प्राप्त है।

इसके अलावा, मोदी की कहानी विवादों और उपलब्धियों दोनों से भरी है। दरअसल, 2002 गुजरात दंगों से लेकर 2016 विमुद्रीकरण तक, हर कदम पर विरोध और समर्थन दोनों रहे। हालांकि, जीएसटी लागू करना, डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत अभियान, आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं ने करोड़ों भारतीयों का जीवन बदला। फिर भी, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना, नागरिकता संशोधन कानून और किसान आंदोलन जैसे मुद्दों पर देश बंटा रहा। वास्तव में, राजनीतिक विश्लेषक उन्हें विभाजनकारी या एकजुट करने वाला बताते हैं। साथ ही, उनकी निजी जिंदगी भी दिलचस्प है। दरअसल, 18 साल की उम्र में विवाह को छोड़कर संन्यासी जीवन चुना। इसलिए, मोदी की जीवनी हर भारतीय के लिए जानना जरूरी है!

Table of Contents

नरेंद्र मोदी की जानकारी | Narendra Modi Ki Jankari

विवरण जानकारी
पूरा नाम नरेंद्र दामोदरदास मोदी
उपनाम नमो, मोदीजी
जन्म तिथि 17 सितंबर 1950
जन्म स्थान वडनगर, मेहसाणा जिला, बॉम्बे राज्य (वर्तमान गुजरात)
उम्र 75 वर्ष (जनवरी 2026 तक)
राशि कन्या राशि
ऊंचाई 5 फीट 7 इंच (170 सेमी)
पिता का नाम दामोदरदास मूलचंद मोदी (1915-1989, चाय विक्रेता)
माता का नाम हीराबेन मोदी (1923-2022, गृहिणी)
भाई-बहन छह संतानों में तीसरे, चार भाई (सोमा, प्रहलाद, पंकज, अमृत) और एक बहन (वसंतीबेन)
धर्म हिंदू धर्म
जाति अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) – मोढ़-घांची तेली समुदाय
राष्ट्रीयता भारतीय
वैवाहिक स्थिति विवाहित (अलग रहते हैं)
पत्नी का नाम जसोदाबेन चिमनलाल मोदी (विवाह 1968, कभी साथ नहीं रहे)
संतान नहीं
शिक्षा स्नातक (राजनीति शास्त्र, दिल्ली विश्वविद्यालय), स्नातकोत्तर (राजनीति शास्त्र, गुजरात विश्वविद्यालय, 1983)
राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)
पद भारत के 14वें प्रधानमंत्री (26 मई 2014 से वर्तमान तक)
कार्यकाल तीन बार – पहला (2014-2019), दूसरा (2019-2024), तीसरा (2024-वर्तमान)
पूर्व पद गुजरात के मुख्यमंत्री (7 अक्टूबर 2001 – 22 मई 2014)
संसदीय क्षेत्र वाराणसी, उत्तर प्रदेश
आरएसएस से जुड़ाव 1970 के दशक से, पूर्णकालिक प्रचारक (1971-1987)
भाजपा में शामिल 1987
प्रमुख योजनाएं स्वच्छ भारत, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, आयुष्मान भारत, जन-धन योजना, उज्ज्वला योजना
अंतरराष्ट्रीय सम्मान 27+ सर्वोच्च नागरिक सम्मान (रूस, भूटान, फ्रांस, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, आदि)
विशेष उपलब्धि आजादी के बाद जन्मे पहले प्रधानमंत्री, लगातार तीन बार पूर्ण बहुमत से चुने गए
लेखन “परीक्षा पे चर्चा” (2018), “ज्योतिपुंज” (2008), कविता संग्रह
सोशल मीडिया सबसे अधिक अनुयायी वाले राजनेता (ट्विटर, इंस्टाग्राम, फेसबुक)
वर्तमान निवास 7, लोक कल्याण मार्ग, नई दिल्ली
अनुमानित संपत्ति लगभग 3 करोड़ रुपये (चुनाव हलफनामा 2024)
Narendra-Modi-bachpan-hindispark.in
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बचपन और परिवार – वडनगर की गलियों से | Bachpan Aur Parivar

नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के मेहसाणा जिले के वडनगर कस्बे में हुआ। दरअसल, यह भारत की आजादी के तीन साल बाद था। हालांकि, परिवार बहुत गरीब था। फिर भी, माता-पिता दामोदरदास और हीराबेन मोदी ने छह बच्चों का पालन-पोषण किया। वास्तव में, नरेंद्र तीसरे बच्चे थे। साथ ही, चार भाई (सोमा, प्रहलाद, पंकज, अमृत) और एक बहन (वसंतीबेन) थे। दरअसल, पूरा परिवार एक छोटे से घर में रहता था। इसलिए, आर्थिक संघर्ष बचपन से ही सिखाया कि मेहनत क्या होती है।

चाय की दुकान पर काम | Chai Ki Dukaan Par Kaam

इसके अलावा, पिता दामोदरदास वडनगर रेलवे स्टेशन पर छोटी सी चाय की दुकान चलाते थे। दरअसल, नरेंद्र अक्सर स्कूल के बाद पिता की मदद करते थे। हालांकि, यात्रियों को चाय परोसना उनका काम था। फिर भी, यह दिन बहुत कठिन थे। वास्तव में, पैसों की तंगी के कारण खाने की भी किल्लत होती थी। साथ ही, घर में कोई विद्युत व्यवस्था नहीं थी। दरअसल, मोदी ने बाद में कहा, “हम गरीब थे लेकिन परिवार में प्यार था। मां हमेशा कहती थीं कि ईमानदारी से काम करो।” इसलिए, ये दिन उनके व्यक्तित्व की नींव बने।

बचपन की रुचियां | Bachpan Ki Ruchiyan

इसके अतिरिक्त, बचपन से ही मोदी में नेतृत्व के गुण थे। दरअसल, स्कूल में वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते थे। हालांकि, पढ़ाई में औसत छात्र थे। फिर भी, नाटकों में बड़े किरदार निभाना पसंद करते थे। वास्तव में, शिक्षकों ने बताया कि वे हमेशा बड़ी-बड़ी भूमिकाएं चाहते थे। साथ ही, यह आदत आज भी उनकी राजनीतिक छवि में दिखती है। दरअसल, 1965 भारत-पाक युद्ध के दौरान सिर्फ 15 साल के नरेंद्र ने रेलवे स्टेशन पर सैनिकों की सेवा की। इसलिए, देशभक्ति बचपन से ही खून में थी।

शिक्षा – संघर्ष भरा सफर | Shiksha

नरेंद्र ने वडनगर से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। दरअसल, 1967 में उन्होंने उच्च माध्यमिक शिक्षा पास की। हालांकि, आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण आगे पढ़ना मुश्किल था। फिर भी, मोदी ने हार नहीं मानी। वास्तव में, बाद में दिल्ली विश्वविद्यालय से दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से राजनीति शास्त्र में स्नातक किया। साथ ही, 1983 में गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। दरअसल, यह पढ़ाई उन्होंने राजनीति में रहते हुए पूरी की। इसलिए, उनका सीखने का जुनून हमेशा बना रहा।

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विवाह – 18 साल में बंधन और त्याग | Vivaah

1968 में जब नरेंद्र सिर्फ 18 साल के थे, परिवार ने उनकी शादी तय कर दी। दरअसल, यह उनकी जाति की परंपरा थी। हालांकि, जसोदाबेन चिमनलाल मोदी से विवाह हुआ। फिर भी, उस समय जसोदाबेन 17 साल की थीं। वास्तव में, विवाह के तुरंत बाद ही नरेंद्र ने घर छोड़ दिया। साथ ही, यह विवाह कभी पूर्ण नहीं हुआ। दरअसल, मोदी ने संन्यासी जीवन चुना। इसलिए, जसोदाबेन से कभी साथ नहीं रहे।

2014 में पहली बार सार्वजनिक स्वीकृति | 2014 Mein Saarvajanik Sweekriti

इसके अलावा, दशकों तक मोदी ने अपने विवाह का जिक्र नहीं किया। दरअसल, अप्रैल 2014 में चुनाव के दौरान पहली बार चुनाव हलफनामे में लिखा कि वे विवाहित हैं। हालांकि, यह खुलासा विवादास्पद था। फिर भी, मोदी के जीवनीकार ने लिखा कि आरएसएस में पूर्णकालिक प्रचारक बनने के लिए उस समय ब्रह्मचर्य जरूरी था। वास्तव में, इसलिए विवाह को गुप्त रखा। साथ ही, जसोदाबेन आज भी गुजरात में एक सेवानिवृत्त शिक्षिका के रूप में रहती हैं। दरअसल, दोनों का कभी तलाक नहीं हुआ। इसलिए, यह निजी जीवन का सबसे चर्चित पहलू है।

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आरएसएस में प्रवेश – जीवन की दिशा बदली | RSS Mein Pravesh

1970 के दशक की शुरुआत में नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े। दरअसल, यह हिंदू राष्ट्रवादी संगठन था। हालांकि, मोदी को इसकी विचारधारा ने आकर्षित किया। फिर भी, शुरुआत में छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के साथ काम किया। वास्तव में, 1971 में मोदी आरएसएस के पूर्णकालिक प्रचारक बन गए। साथ ही, इसके लिए नागपुर में प्रशिक्षण लिया। दरअसल, आरएसएस में हर पद के लिए यह प्रशिक्षण अनिवार्य था। इसलिए, मोदी ने संगठनात्मक कौशल सीखा।

1975 आपातकाल – विरोध में सक्रिय | Aapatkal Mein Sakriya

इसके अलावा, 1975 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाया। दरअसल, यह भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला दौर था। हालांकि, आरएसएस सहित कई संगठनों पर प्रतिबंध लगा। फिर भी, मोदी ने भूमिगत रहकर आपातकाल विरोधी आंदोलन में सक्रिय भाग लिया। वास्तव में, वे विभिन्न शहरों में गुप्त रूप से घूमते और विरोध प्रदर्शन आयोजित करते। साथ ही, मोदी ने बाद में इस दौर को अपने जीवन का महत्वपूर्ण अनुभव बताया। दरअसल, इसी समय उनके नेतृत्व गुण निखरे। इसलिए, आरएसएस के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें पहचाना।

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भाजपा में प्रवेश – 1987 का ऐतिहासिक कदम | BJP Mein Pravesh

1987 में मोदी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए। दरअसल, आरएसएस ने उन्हें भाजपा में भेजा। हालांकि, 1988 में उन्हें गुजरात भाजपा का महासचिव बनाया गया। फिर भी, शुरुआती सालों में भाजपा गुजरात में कमजोर थी। वास्तव में, कांग्रेस का राज्य में बोलबाला था। साथ ही, मोदी को पार्टी मजबूत करनी थी। दरअसल, 1990 में भाजपा गठबंधन सरकार में शामिल हुई। इसलिए, मोदी की पहली राजनीतिक सफलता थी।

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1995 – गुजरात में भाजपा की पहली सरकार | Gujarat Mein Pehli Sarkar

इसके अलावा, 1995 के विधानसभा चुनाव में मोदी की संगठनात्मक क्षमता चमकी। दरअसल, भाजपा ने 121 सीटें जीतीं और पहली बार अकेले सरकार बनाई। हालांकि, यह केवल डेढ़ साल चली। फिर भी, गुजरात में भाजपा का पहला सरकारी अनुभव था। वास्तव में, 1995 में मोदी को भाजपा का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया। साथ ही, 1998 में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बने। दरअसल, इस पद पर रहते हुए 1998 लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत सुनिश्चित की। इसलिए, राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनी।

गुजरात के मुख्यमंत्री – 2001 से 2014 तक | Gujarat Ke Mukhyamantri

7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी गुजरात के 14वें मुख्यमंत्री बने। दरअसल, उस समय गुजरात में भाजपा सरकार थी। हालांकि, मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल को 2001 भुज भूकंप की विफलता के लिए दोषी ठहराया गया। फिर भी, पार्टी ने मोदी को उनकी जगह चुना। वास्तव में, यह एक बड़ा मौका था। साथ ही, मोदी को साबित करना था कि वे केवल संगठक नहीं बल्कि शासक भी बन सकते हैं। दरअसल, फरवरी 2002 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और मणिनगर सीट से जीते। इसलिए, औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री बने।

2002 गुजरात दंगे – सबसे बड़ा विवाद | 2002 Gujarat Dange

इसके अलावा, 27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में आग लगी। दरअसल, इसमें 59 लोग मारे गए। हालांकि, इसके बाद पूरे गुजरात में सांप्रदायिक दंगे भड़के। फिर भी, अनुमान है कि 1,000 से अधिक लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर मुस्लिम थे। वास्तव में, मोदी पर आरोप लगे कि उन्होंने हिंसा रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। साथ ही, कुछ ने कहा कि सरकार ने दंगों को बढ़ावा दिया। दरअसल, 2005 में अमेरिका ने मोदी का वीजा रद्द कर दिया। इसलिए, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद बढ़ा।

हालांकि, कई जांच आयोगों ने मोदी को क्लीन चिट दी। फिर भी, 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मोदी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। वास्तव में, लेकिन यह मुद्दा आज भी मोदी के करियर पर सबसे बड़ा सवालिया निशान है। साथ ही, विरोधी दल इसे हमेशा उठाते हैं। दरअसल, मानवाधिकार संगठन मोदी को जिम्मेदार मानते हैं। इसलिए, 2002 के दंगे मोदी की सबसे विवादास्पद विरासत हैं।

2002 चुनाव – भारी बहुमत से जीत | 2002 Chunav

इसके अतिरिक्त, दंगों के बाद दिसंबर 2002 में विधानसभा चुनाव हुए। दरअसल, सभी को लगा कि भाजपा हार जाएगी। हालांकि, मोदी ने चुनाव हिंदुत्व के मुद्दे पर लड़ा। फिर भी, भाजपा ने 127 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। वास्तव में, यह मोदी की राजनीतिक चतुराई थी। साथ ही, इसके बाद 2007 और 2012 के चुनाव भी बड़े बहुमत से जीते। दरअसल, 13 साल तक लगातार गुजरात के मुख्यमंत्री रहे। इसलिए, मोदी गुजरात में अपराजेय हो गए।

गुजरात मॉडल – विकास की कहानी | Gujarat Model

इसके अलावा, मोदी ने गुजरात में तेज आर्थिक विकास पर ध्यान दिया। दरअसल, बड़ी कंपनियों को निवेश के लिए आमंत्रित किया। हालांकि, विब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन शुरू किया जो हर दो साल में होता था। फिर भी, बुनियादी ढांचे, बिजली और सड़कों पर काम हुआ। वास्तव में, गुजरात की विकास दर राष्ट्रीय औसत से अधिक थी। साथ ही, 2006 में पत्रिका “इंडिया टुडे” ने सर्वेक्षण में मोदी को सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री घोषित किया। दरअसल, मोदी ने इसे “गुजरात मॉडल” कहा। इसलिए, राष्ट्रीय स्तर पर उनकी छवि विकास पुरुष की बनी।

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2014 प्रधानमंत्री पद की दौड़ | 2014 PM Ki Daud

जून 2013 में भाजपा ने मोदी को 2014 लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया। दरअसल, पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता इसके खिलाफ थे। हालांकि, एलके आडवाणी ने चिंता जताई। फिर भी, पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने मोदी का समर्थन सुनिश्चित किया। वास्तव में, पहली बार भाजपा ने चुनाव किसी व्यक्ति के नाम पर लड़ा। साथ ही, “अच्छे दिन आने वाले हैं” और “सबका साथ, सबका विकास” जैसे नारे बहुत लोकप्रिय हुए। दरअसल, मोदी ने पूरे देश में 400 से अधिक रैलियां कीं। इसलिए, यह चुनाव मोदी पर जनमत संग्रह बन गया।

26 मई 2014 – पहली बार प्रधानमंत्री | Pehli Baar Prime Minister

इसके अलावा, 16 मई 2014 को परिणाम आए। दरअसल, भाजपा ने 282 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया। हालांकि, यह 30 साल बाद किसी पार्टी का पूर्ण बहुमत था। फिर भी, कांग्रेस सिर्फ 44 सीटों पर सिमट गई। वास्तव में, 26 मई 2014 को मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। साथ ही, पाकिस्तान और अन्य सार्क देशों के नेताओं को भी शपथ समारोह में बुलाया। दरअसल, यह अभूतपूर्व था। इसलिए, मोदी की राजनीतिक यात्रा का सबसे बड़ा पल था।

पहला कार्यकाल (2014-2019) – प्रमुख योजनाएं और निर्णय | Pehla Karyakaal

प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने कई बड़ी योजनाएं शुरू कीं:

  • स्वच्छ भारत अभियान (2 अक्टूबर 2014) – भारत को स्वच्छ बनाने का अभियान, शौचालय निर्माण
  • डिजिटल इंडिया (1 जुलाई 2015) – भारत को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना
  • मेक इन इंडिया (25 सितंबर 2014) – भारत में विनिर्माण को बढ़ावा
  • जन-धन योजना (28 अगस्त 2014) – गरीबों के लिए बैंक खाते, 50 करोड़ से अधिक खाते खोले गए
  • उज्ज्वला योजना (1 मई 2016) – गरीब महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन, 9 करोड़ से अधिक कनेक्शन
  • आयुष्मान भारत (23 सितंबर 2018) – 50 करोड़ लोगों को मुफ्त स्वास्थ्य बीमा
  • मुद्रा योजना – छोटे व्यवसायों के लिए सस्ते ऋण

8 नवंबर 2016 – विमुद्रीकरण | Vimudrikaran

दरअसल, 8 नवंबर 2016 की रात मोदी ने घोषणा की कि 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट रद्द हो गए। हालांकि, इसका उद्देश्य काले धन और नकली नोटों पर रोक था। फिर भी, यह निर्णय बहुत विवादास्पद रहा। वास्तव में, आम लोगों को बैंकों में लंबी कतारों में लगना पड़ा। साथ ही, छोटे व्यवसाय ठप हो गए। दरअसल, आर्थिक विशेषज्ञों ने इसकी आलोचना की। इसलिए, विमुद्रीकरण मोदी के सबसे विवादित फैसलों में से एक रहा।

1 जुलाई 2017 – वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) | GST

इसके अलावा, 1 जुलाई 2017 को भारत में जीएसटी लागू हुआ। दरअसल, यह सबसे बड़ा कर सुधार था। हालांकि, पहले कई अलग-अलग कर थे। फिर भी, अब एक ही कर व्यवस्था बनी। वास्तव में, शुरुआत में कई समस्याएं आईं। साथ ही, छोटे व्यवसायियों को परेशानी हुई। दरअसल, लेकिन धीरे-धीरे व्यवस्था सुधरी। इसलिए, जीएसटी को मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धि माना जाता है।

2019 बालाकोट हवाई हमला | Balakot Airstrike

इसके अतिरिक्त, 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में आतंकी हमले में 40 जवान शहीद हो गए। दरअसल, पूरे देश में गुस्सा था। हालांकि, 26 फरवरी 2019 को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी शिविर पर हवाई हमला किया। फिर भी, यह 1971 के बाद पहली बार था जब भारत ने पाकिस्तान की जमीन पर हमला किया। वास्तव में, मोदी की छवि मजबूत नेता की बनी। साथ ही, इस घटना ने 2019 चुनाव में बड़ी भूमिका निभाई। इसलिए, राष्ट्रवाद चुनाव का मुख्य मुद्दा बना।

दूसरा कार्यकाल (2019-2024) – ऐतिहासिक निर्णय | Doosra Karyakaal

23 मई 2019 को फिर से चुनाव परिणाम आए। दरअसल, भाजपा ने 303 सीटें जीतकर पहले से भी बड़ा बहुमत हासिल किया। हालांकि, यह लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत था। फिर भी, 30 मई 2019 को मोदी ने दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। वास्तव में, अब उनके पास बड़े फैसले लेने की ताकत थी। साथ ही, दूसरे कार्यकाल में कई ऐतिहासिक कदम उठाए। इसलिए, यह कार्यकाल और भी महत्वपूर्ण रहा।

5 अगस्त 2019 – अनुच्छेद 370 हटाना | Anucched 370 Hatana

दरअसल, 5 अगस्त 2019 को सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा दिया। हालांकि, यह अनुच्छेद जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देता था। फिर भी, मोदी सरकार ने कहा कि यह राज्य के विकास में बाधा था। वास्तव में, जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया। साथ ही, इस फैसले पर देश में मिश्रित प्रतिक्रिया रही। दरअसल, समर्थकों ने इसे ऐतिहासिक बताया। इसलिए, विरोधियों ने इसे लोकतंत्र पर हमला कहा।

नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) | CAA

इसके अलावा, दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन कानून पारित हुआ। दरअसल, यह पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रावधान था। हालांकि, विरोधियों ने कहा कि यह मुस्लिमों के खिलाफ भेदभाव है। फिर भी, पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए। वास्तव में, दिसंबर 2019 से फरवरी 2020 तक बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। साथ ही, दिल्ली दंगे भी भड़के जिनमें 53 लोग मारे गए। दरअसल, यह कानून आज भी विवादित है। इसलिए, इसकी पूरी तरह से लागू नहीं हुआ।

2020-2021 किसान आंदोलन | Kisan Andolan

इसके अतिरिक्त, सितंबर 2020 में सरकार ने तीन कृषि कानून पारित किए। दरअसल, सरकार ने कहा कि ये कानून किसानों के लिए फायदेमंद हैं। हालांकि, किसान संगठनों ने विरोध किया। फिर भी, कहा कि ये कानून न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म करेंगे। वास्तव में, नवंबर 2020 से दिसंबर 2021 तक देश का सबसे बड़ा किसान आंदोलन हुआ। साथ ही, दिल्ली की सीमाओं पर हजारों किसान महीनों तक डटे रहे। दरअसल, नवंबर 2021 में मोदी सरकार ने तीनों कानून वापस ले लिए। इसलिए, यह मोदी सरकार की सबसे बड़ी वापसी थी।

कोविड-19 महामारी – भारत का जवाब | COVID-19 Mahamari

दरअसल, मार्च 2020 में कोरोना वायरस महामारी भारत में फैली। हालांकि, 24 मार्च 2020 को मोदी ने अचानक पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा की। फिर भी, यह दुनिया का सबसे सख्त लॉकडाउन था। वास्तव में, लाखों प्रवासी मजदूर पैदल घर लौटे। साथ ही, आर्थिक गतिविधियां ठप हो गईं। दरअसल, विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में 47 लाख लोगों की मृत्यु हुई (सरकारी आंकड़ा 5 लाख)। इसलिए, मोदी सरकार की महामारी प्रबंधन पर आलोचना हुई। हालांकि, 2021 में भारत ने तेजी से टीकाकरण अभियान चलाया। फिर भी, 100 करोड़ से अधिक लोगों को टीका लगाया। वास्तव में, यह बड़ी उपलब्धि थी।

तीसरा कार्यकाल (2024-वर्तमान) – गठबंधन सरकार | Teesra Karyakaal

4 जून 2024 को चुनाव परिणाम आए। दरअसल, इस बार भाजपा ने 240 सीटें जीतीं। हालांकि, यह पूर्ण बहुमत (272) से कम था। फिर भी, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने 293 सीटें जीतकर सरकार बनाई। वास्तव में, पहली बार मोदी को गठबंधन सहयोगियों पर निर्भर रहना पड़ा। साथ ही, 9 जून 2024 को मोदी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। दरअसल, लगातार तीन कार्यकाल पूरे करने वाले पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने। इसलिए, यह ऐतिहासिक उपलब्धि है।

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प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मान | Pramukh Antarrashtriya Samman

मोदी को 27 से अधिक देशों के सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिले हैं:

वर्ष देश सम्मान
2016 सऊदी अरब किंग अब्दुलअजीज सैश
2016 अफगानिस्तान अमीर अमानुल्लाह खान पुरस्कार
2018 संयुक्त राष्ट्र चैंपियंस ऑफ द अर्थ पुरस्कार
2019 रूस ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू (2024 में प्रदान)
2019 संयुक्त अरब अमीरात ऑर्डर ऑफ जायद
2019 बहरीन किंग हमद ऑर्डर ऑफ द रिनेसां
2019 मालदीव रूल ऑफ निशान इज्जुद्दीन
2020 अमेरिका लीजन ऑफ मेरिट
2021 भूटान ऑर्डर ऑफ द ड्रुक ग्यालपो (दिसंबर 2021, मार्च 2024 में प्रदान)
2023 मिस्र ऑर्डर ऑफ द नाइल
2023 फ्रांस ग्रैंड क्रॉस ऑफ द लीजन ऑफ ऑनर
2023 ग्रीस ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ ऑनर
2024 नाइजीरिया ग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द नाइजर
2024 कुवैत ऑर्डर ऑफ मुबारक द ग्रेट
2025 मॉरीशस ऑर्डर ऑफ द स्टार एंड की
2025 श्रीलंका श्रीलंका मित्र विभूषण
2025 ब्राजील ग्रैंड कॉलर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द सदर्न क्रॉस

वास्तव में, मोदी भारतीय इतिहास में सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय सम्मान पाने वाले नेता हैं। साथ ही, यह भारत की बढ़ती वैश्विक स्थिति को दर्शाता है।

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व्यक्तिगत जीवन और रुचियां | Vyaktigat Jeevan

मोदी का व्यक्तिगत जीवन बहुत अनुशासित है। दरअसल, वे रोज सुबह योग करते हैं। हालांकि, नींद बहुत कम लेते हैं। फिर भी, ऊर्जा भरपूर रहती है। वास्तव में, मोदी शाकाहारी हैं। साथ ही, नवरात्रि में उपवास रखते हैं। दरअसल, वे सोशल मीडिया पर बहुत सक्रिय हैं। इसलिए, दुनिया के सबसे अधिक अनुयायी वाले राजनेता हैं।

लेखन और कविता | Lekhan Aur Kavita

इसके अलावा, मोदी लेखन में रुचि रखते हैं। दरअसल, कई किताबें लिखी हैं:

  • “परीक्षा पे चर्चा” (2018) – छात्रों के लिए प्रेरक पुस्तक
  • “ज्योतिपुंज” (2008) – आरएसएस नेताओं की जीवनी, गुजराती में
  • “आपातकाल में गुजरात” (2004) – 1975 आपातकाल की कहानी
  • कविता संग्रह – “भाव यात्रा” नाम से कविताएं

वास्तव में, मोदी कविता लिखना पसंद करते हैं। साथ ही, गुजराती और हिंदी दोनों में लिखते हैं। इसलिए, उनका रचनात्मक पक्ष भी है।

विवाद और आलोचना | Vivad Aur Aalochana

मोदी के करियर में कई विवाद रहे:

  • 2002 गुजरात दंगे – सबसे बड़ा और स्थायी विवाद
  • 2016 विमुद्रीकरण – आर्थिक विशेषज्ञों की आलोचना
  • नागरिकता संशोधन कानून – मुस्लिम विरोधी होने के आरोप
  • किसान कानून वापसी – नीति विफलता
  • कोविड प्रबंधन – 47 लाख मौतों की रिपोर्ट
  • मीडिया नियंत्रण – प्रेस की स्वतंत्रता पर सवाल
  • विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई – जांच एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोप

निष्कर्ष | Nishkarsh

नरेंद्र मोदी की कहानी आधुनिक भारत की सबसे असाधारण राजनीतिक यात्राओं में से एक है। दरअसल, वडनगर रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने वाला लड़का आज दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेताओं में से एक है। हालांकि, यह यात्रा आसान नहीं थी। फिर भी, संघर्ष, त्याग और अथक मेहनत ने उन्हें यहां तक पहुंचाया। वास्तव में, लगातार तीन बार प्रधानमंत्री बनना और 27 से अधिक अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त करना उनकी उपलब्धि का प्रमाण है। साथ ही, स्वच्छ भारत, डिजिटल इंडिया, आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं ने करोड़ों जिंदगियां बदलीं। दरअसल, भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत हुई है। इसलिए, समर्थक उन्हें विकास पुरुष मानते हैं।

हालांकि, विवाद और आलोचना भी कम नहीं हैं। दरअसल, 2002 गुजरात दंगे आज भी उनके करियर पर सबसे बड़ा सवालिया निशान हैं। हालांकि, विपक्ष उन्हें विभाजनकारी और सांप्रदायिक बताता है। फिर भी, विमुद्रीकरण, नागरिकता कानून, किसान आंदोलन और कोविड प्रबंधन पर सवाल उठे। वास्तव में, प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भी चिंताएं हैं। साथ ही, आर्थिक असमानता बढ़ी है। दरअसल, बेरोजगारी चिंता का विषय है। इसलिए, आलोचक कहते हैं कि विकास केवल कुछ लोगों तक सीमित रहा।

फिर भी, यह निर्विवाद है कि मोदी ने भारतीय राजनीति को हमेशा के लिए बदल दिया। वास्तव में, उनकी लोकप्रियता और जनसंपर्क अद्वितीय है। साथ ही, सोशल मीडिया का उपयोग और सीधे जनता से संवाद करने की क्षमता बेजोड़ है। दरअसल, चाहे समर्थक हों या विरोधी, सभी मानते हैं कि मोदी आधुनिक भारत के सबसे प्रभावशाली नेता हैं। हालांकि, इतिहास ही तय करेगा कि उनकी विरासत क्या होगी। फिर भी, एक बात तय है – नरेंद्र मोदी की कहानी लाखों भारतीयों के लिए प्रेरणा है कि कठिन परिस्थितियों से भी सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा जा सकता है!

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न | FAQ

  • 1. Narendra Modi की उम्र क्या है?

    75 वर्ष (जनवरी 2026 तक)। दरअसल, जन्म 17 सितंबर 1950 को हुआ।

  • 2. मोदी कितनी बार प्रधानमंत्री बने?

    तीन बार – 2014, 2019 और 2024। वास्तव में, लगातार तीन कार्यकाल पूरे करने वाले पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री।

  • 3. मोदी ने चाय कब बेची?

    बचपन में वडनगर रेलवे स्टेशन पर। दरअसल, पिता की चाय की दुकान में मदद करते थे।

  • 4. गुजरात के कितने साल मुख्यमंत्री रहे?

    13 साल (अक्टूबर 2001 से मई 2014)। हालांकि, चार बार चुनाव जीते।

  • 5. 2002 गुजरात दंगों में क्या भूमिका थी?

    विवादास्पद। दरअसल, आरोप लगे लेकिन कोर्ट ने क्लीन चिट दी।

  • 6. क्या मोदी विवाहित हैं?

    हां, जसोदाबेन से। हालांकि, कभी साथ नहीं रहे। फिर भी, तलाक नहीं हुआ।

  • 7. कितने अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले?

    27 से अधिक देशों के सर्वोच्च नागरिक सम्मान। वास्तव में, भारतीय इतिहास में सर्वाधिक।

  • 8. प्रमुख योजनाएं कौन सी हैं?

    स्वच्छ भारत, डिजिटल इंडिया, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला, जन-धन। साथ ही, मेक इन इंडिया।

  • 9. विमुद्रीकरण कब हुआ?

    8 नवंबर 2016। दरअसल, 500-1000 के पुराने नोट रद्द किए।

  • 10. अनुच्छेद 370 कब हटाया?

    5 अगस्त 2019। हालांकि, जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा हटाया।

  • 11. आरएसएस से कब जुड़े?

    1970 के दशक में। वास्तव में, 1971 से पूर्णकालिक प्रचारक बने।

  • 12. भाजपा में कब शामिल हुए?

    1987 में। दरअसल, 1988 में गुजरात भाजपा के महासचिव बने।

  • 13. संसदीय क्षेत्र कौन सा है?

    वाराणसी, उत्तर प्रदेश। हालांकि, 2014 से प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

  • 14. माता-पिता कौन थे?

    दामोदरदास मोदी (चाय विक्रेता) और हीराबेन मोदी (गृहिणी, 2022 में निधन)।

  • 15. संपत्ति कितनी है?

    लगभग 3 करोड़ रुपये। वास्तव में, 2024 चुनाव हलफनामे के अनुसार।

Gagandeep
Gagandeep
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