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आधुनिक युग में डॉ. सीमा आनंद एक अनोखी शख्सियत हैं। दरअसल, वे प्राचीन भारतीय ग्रंथों को आधुनिक भाषा में लाकर लाखों लोगों को शिक्षित कर रही हैं। हालांकि, कामसूत्र और तंत्र जैसे विषयों पर खुलकर बात करना भारत में आज भी वर्जित माना जाता है। फिर भी, सीमा ने इस दीवार को तोड़ा है। वास्तव में, 80 लाख से अधिक बार देखे गए उनके टेडएक्स व्याख्यान ने दुनिया भर में तहलका मचाया। साथ ही, 20 लाख से अधिक इंस्टाग्राम अनुयायी उनकी कहानियां सुनते हैं। इसलिए, 63 वर्ष की उम्र में वे युवा पीढ़ी के बीच सबसे ज्यादा चर्चित शिक्षिकाओं में से एक हैं।
इसके अलावा, सीमा केवल यौन शिक्षा तक सीमित नहीं हैं। दरअसल, वे कहानी चिकित्सक, पौराणिक कथाओं की विशेषज्ञ और महिला कथाओं की शोधकर्ता हैं। हालांकि, यूनेस्को के साथ मिलकर लुप्त हो रही मौखिक परंपराओं को बचाने का काम कर रही हैं। फिर भी, उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा। वास्तव में, 19 साल की उम्र में पिता की हत्या ने उन्हें तोड़ दिया था। साथ ही, तीन बच्चों की माँ होते हुए भी शोध और लेखन जारी रखा। दरअसल, उनकी किताब “द आर्ट्स ऑफ सिडक्शन” (मोहित करने की कलाएं) विश्व प्रसिद्ध है। इसलिए, सीमा आनंद की कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो प्राचीन ज्ञान को आधुनिक समाज में लाना चाहता है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पूरा नाम | डॉ. सीमा आनंद |
| उपनाम | आनंद के संरक्षक संत (सोशल मीडिया पर) |
| जन्म तिथि | 18 अगस्त 1962 |
| जन्म स्थान | भारत (कुछ स्रोतों में लंदन) |
| उम्र | 63 वर्ष (जनवरी 2026 तक) |
| राशि | सिंह राशि |
| ऊंचाई | जानकारी उपलब्ध नहीं |
| वजन | जानकारी उपलब्ध नहीं |
| पेशा | कहानीकार, पौराणिक कथा विशेषज्ञ, यौन स्वास्थ्य शिक्षिका, लेखिका, प्रेरक वक्ता |
| विशेषज्ञता | कामसूत्र, तंत्र, महाविद्याएं, महाभारत, भगवद गीता, महिला कथाएं |
| पिता का नाम | जानकारी उपलब्ध नहीं (सौतेले पिता राजदूत थे, 1982 में हत्या) |
| माता का नाम | जानकारी उपलब्ध नहीं |
| परदादी | सामाजिक कार्यकर्ता और स्कूल निरीक्षक (ब्रिटिश राज के दौरान) |
| धर्म | हिंदू धर्म |
| राष्ट्रीयता | भारतीय मूल, लंदन में बसी |
| वैवाहिक स्थिति | विवाहित |
| पति का नाम | जानकारी निजी (सार्वजनिक नहीं) |
| संतान | तीन बच्चे |
| वर्तमान निवास | लंदन, इंग्लैंड |
| शिक्षा | मुसौरी स्कूल (स्कूल), दिल्ली विश्वविद्यालय (स्नातक), कोलकाता से पीएचडी (कथा अभ्यास में) |
| योग्यता | पीएचडी (महिला कथाओं में विशेषज्ञता), कथाविज्ञान (कहानियों का अध्ययन) |
| प्रमुख किताब | “द आर्ट्स ऑफ सिडक्शन” (2017/2019) |
| टेडएक्स व्याख्यान | “द आर्ट ऑफ सिडक्शन” (80 लाख से अधिक बार देखा गया) |
| इंस्टाग्राम | @seemaanandstorytelling (20 लाख से अधिक अनुयायी) |
| यूट्यूब | 2.78 लाख से अधिक सदस्य (2016 से सक्रिय) |
| संगठन | लुक बियॉन्ड इंडिया (नई दिल्ली, 1998 से निदेशक) |
| यूनेस्को कार्य | लुप्त हो रही मौखिक परंपराओं को संरक्षित करना |
| संग्रहालय सहयोग | ब्रिटिश म्यूजियम, विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम |
| गिनीज रिकॉर्ड | विश्व की सबसे बड़ी रंगोली |
| कॉर्पोरेट कार्य | नेतृत्व कौशल के लिए कहानी कहने की शिक्षा |
| दिवाली आयोजन | लंदन के सबसे बड़े दिवाली कार्यक्रम की निदेशक |
| हाल की चर्चा | जनवरी 2026 में शुभंकर मिश्रा के पॉडकास्ट में वायरल |
| अनुमानित संपत्ति | लगभग 15-35 करोड़ रुपये (2-5 मिलियन डॉलर) |

सीमा आनंद का जन्म 18 अगस्त 1962 को हुआ। दरअसल, उनका परिवार उच्च शिक्षित था। हालांकि, परदादी ब्रिटिश राज के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता और स्कूल निरीक्षक थीं। फिर भी, यह परंपरा परिवार में चलती रही। वास्तव में, सीमा को बचपन से ही कहानियों से प्यार था। साथ ही, परिवार में महिलाओं की मजबूत भूमिका थी। दरअसल, यही उनके भविष्य के काम की नींव बनी। इसलिए, महिला सशक्तिकरण उनके जीवन का केंद्र रहा।
इसके अलावा, 1982 में सीमा के जीवन में एक भयंकर त्रासदी घटी। दरअसल, वे उस समय 19 साल की थीं। हालांकि, उनके सौतेले पिता जो राजदूत थे, उनकी हत्या कर दी गई। फिर भी, यह घटना बहुत क्रूर थी। वास्तव में, इस दौरान उनके चाचा भी घायल हुए। साथ ही, सीमा मानसिक रूप से टूट गईं। दरअसल, उन्होंने विश्वास खो दिया कि जीवन में कुछ अच्छा होगा। इसलिए, यह समय उनके लिए सबसे कठिन था। हालांकि, बाद में उन्होंने कहानियों में सांत्वना पाई। फिर भी, इस पीड़ा ने उन्हें मजबूत बनाया। वास्तव में, यही कारण बना कि वे लोगों की कहानियों को समझने और उनकी मदद करने के काम में आईं।
सीमा ने अपनी स्कूली शिक्षा मुसौरी स्कूल से प्राप्त की। दरअसल, यह उत्तराखंड के प्रसिद्ध पहाड़ी स्कूलों में से एक था। हालांकि, स्नातक की पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय से पूरी की। फिर भी, सीमा की रुचि कहानियों में थी। वास्तव में, पिता की मृत्यु के बाद उनके एक प्रोफेसर ने सुझाव दिया कि वे अपने जीवन की छोटी-छोटी घटनाओं को कहानियों में लिखें। साथ ही, इससे मानसिक चिकित्सा में मदद मिलेगी। दरअसल, सीमा ने यह किया और उन्हें लाभ हुआ। इसलिए, कहानियों की चिकित्सीय शक्ति को समझा।
इसके अलावा, 23 साल की उम्र में सीमा लंदन चली गईं। दरअसल, वहां उन्होंने कोलकाता से पीएचडी पूरी की। हालांकि, उनका विषय कथाविज्ञान (नैरेटोलॉजी) था। फिर भी, यह कहानियों का अध्ययन है – कैसे कहानियां हमारे जीवन को आकार देती हैं। वास्तव में, उन्होंने प्राचीन भारतीय मौखिक परंपराओं पर शोध किया। साथ ही, महिला कथाओं में विशेषज्ञता हासिल की। दरअसल, महाभारत, पुराण, कामसूत्र, तंत्र जैसे ग्रंथों का गहन अध्ययन किया। इसलिए, वे इन विषयों की प्रमाणिक विशेषज्ञ बनीं। हालांकि, पीएचडी करना आसान नहीं था। फिर भी, तीसरे बच्चे के जन्म के बाद भी शोध जारी रखा। वास्तव में, यह उनकी दृढ़ता का प्रमाण था।
सीमा ने अपने करियर की शुरुआत कहानी चिकित्सक के रूप में की। दरअसल, वे लोगों को उनकी अपनी कहानियां बताने और समझने में मदद करती थीं। हालांकि, यह मनोविज्ञान का एक नया तरीका था। फिर भी, बहुत प्रभावी था। वास्तव में, सीमा ने पाया कि हर व्यक्ति कहानियों का संग्रह है। साथ ही, जो कहानियां हम खुद को सुनाते हैं, वही हमारी पहचान बनती हैं। दरअसल, कई बार ये कहानियां गलत या दूसरों की थोपी हुई होती हैं। इसलिए, सीमा लोगों को उनकी असली कहानी खोजने में मदद करती थीं।
इसके अलावा, शुरुआती दिन बहुत कठिन थे। दरअसल, शोध के लिए धन मिलना मुश्किल था। हालांकि, महिला कथाओं और यौन शिक्षा पर काम करने वालों को लोग गंभीरता से नहीं लेते थे। फिर भी, कई लोगों ने उनका मजाक उड़ाया। वास्तव में, पुरुष समाज को लगता था कि ये विषय हास्यास्पद हैं। साथ ही, महिलाओं की शारीरिक स्वतंत्रता की बात करना अपमानजनक माना जाता था। दरअसल, सीमा को कई संस्थाओं से मना कर दिया गया। इसलिए, धीरे-धीरे आगे बढ़ना पड़ा। हालांकि, हार नहीं मानी।
मार्च 1998 में सीमा ने नई दिल्ली में लुक बियॉन्ड इंडिया नामक कल्याण केंद्र की स्थापना की। दरअसल, यह समग्र जीवनशैली परामर्श केंद्र था। हालांकि, यहां योग, ध्यान, पोषण और मानसिक स्वास्थ्य पर काम होता था। फिर भी, सीमा का मुख्य ध्यान कहानी चिकित्सा पर था। वास्तव में, महिलाओं के लिए विशेष कार्यशालाएं होती थीं। साथ ही, यहां प्राचीन भारतीय ज्ञान को आधुनिक तरीकों से सिखाया जाता था। दरअसल, सीमा आज भी इसकी निदेशक हैं। इसलिए, 25 साल से यह संस्था चल रही है।
सीमा का एक बड़ा योगदान यूनेस्को के साथ उनका काम है। दरअसल, यूनेस्को की एक पहल है जो लुप्त हो रही मौखिक परंपराओं को बचाना चाहती है। हालांकि, भारत में कई पुरानी कहानियां और लोककथाएं धीरे-धीरे भुलाई जा रही हैं। फिर भी, सीमा इन्हें संरक्षित कर रही हैं। वास्तव में, वे पुरानी कहानियों को आधुनिक भाषा में अनुवाद करती हैं। साथ ही, विभिन्न सांस्कृतिक दर्शकों के लिए इन्हें फिर से लिखती हैं। दरअसल, उनका उद्देश्य प्राचीन ज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाना है। इसलिए, यह बहुत महत्वपूर्ण काम है।

इसके अलावा, सीमा ने ब्रिटिश म्यूजियम और विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम के लिए शैक्षिक सामग्री विकसित की है। दरअसल, यह सामग्री महाभारत, पुराण और अन्य प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। हालांकि, इसे बच्चों और युवाओं के लिए सरल बनाया गया है। फिर भी, गहराई बरकरार है। वास्तव में, इस तरह पश्चिमी देशों में भारतीय संस्कृति को समझाया जाता है। साथ ही, सीमा इन संस्थानों में नियमित व्याख्यान भी देती हैं। इसलिए, वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त विद्वान हैं।
सीमा का एक और महत्वपूर्ण काम कॉर्पोरेट क्षेत्र में है। दरअसल, वे बड़ी कंपनियों को नेतृत्व कौशल के लिए कहानी कहना सिखाती हैं। हालांकि, यह अनोखा विषय है। फिर भी, बहुत प्रभावी है। वास्तव में, अच्छे नेता वही होते हैं जो अपनी टीम को प्रेरित करने की कहानियां बता सकें। साथ ही, कहानियों से संदेश लोगों के दिमाग में जल्दी बैठता है। दरअसल, सीमा सांस्कृतिक समझ, टीम निर्माण और संचार के लिए कहानियों का उपयोग सिखाती हैं। इसलिए, बड़ी कंपनियां उन्हें बुलाती हैं।
इसके अलावा, सीमा के नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड है। दरअसल, उन्होंने विश्व की सबसे बड़ी रंगोली बनाई। हालांकि, यह केवल कला नहीं थी। फिर भी, यह भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने का प्रयास था। वास्तव में, सीमा रंगोली कला में भी कुशल हैं। साथ ही, वे लंदन के सबसे बड़े दिवाली कार्यक्रम की निदेशक भी हैं। दरअसल, हर साल हजारों लोग इस कार्यक्रम में शामिल होते हैं। इसलिए, सीमा ने विदेश में भारतीय संस्कृति को मजबूत किया है।
जनवरी 2016 में सीमा ने अपना यूट्यूब चैनल शुरू किया। दरअसल, उनका उद्देश्य युवा पीढ़ी तक पहुंचना था। हालांकि, शुरुआत में लोगों ने सोचा कि 63 साल की महिला सोशल मीडिया पर क्या करेगी। फिर भी, सीमा ने सबको गलत साबित किया। वास्तव में, उनके छोटे वीडियो जिनमें प्राचीन कहानियां सरल भाषा में बताई जाती थीं, वायरल होने लगे। साथ ही, 2017 में इंस्टाग्राम पर भी सक्रिय हुईं। दरअसल, आज उनके 20 लाख से अधिक इंस्टाग्राम अनुयायी हैं। इसलिए, वे सबसे सफल भारतीय डिजिटल निर्माताओं में से एक बन गईं।
इसके अलावा, सीमा की इंस्टाग्राम रणनीति बहुत अनोखी थी। दरअसल, वे साड़ी पहनकर, बड़ी बिंदी लगाकर और शांत आवाज में कहानियां सुनाती हैं। हालांकि, विषय बहुत साहसी होते हैं। फिर भी, तरीका इतना सम्मानजनक है कि कोई आपत्ति नहीं कर पाता। वास्तव में, उनकी रील्स (छोटे वीडियो) लाखों बार देखी जाती हैं। साथ ही, लोग टिप्पणियों में अपने सवाल पूछते हैं। दरअसल, सीमा हर पीढ़ी के बीच संवाद स्थापित करना चाहती हैं। इसलिए, उनका काम बहुत महत्वपूर्ण है।

फरवरी 2019 में सीमा की पहली किताब “द आर्ट्स ऑफ सिडक्शन” (मोहित करने की कलाएं) प्रकाशित हुई। दरअसल, यह किताब प्राचीन भारतीय ज्ञान पर आधारित है। हालांकि, इसका मुख्य स्रोत कामसूत्र है। फिर भी, सीमा ने इसे 21वीं सदी के लिए फिर से लिखा। वास्तव में, उनका उद्देश्य यौन आनंद और संबंधों को लेकर गलतफहमियां दूर करना था। साथ ही, यह बताना कि कामसूत्र केवल शारीरिक स्थितियों की किताब नहीं है। दरअसल, यह मन, शरीर और आत्मा की ऊर्जा को अनुकूलित करने की कला है। इसलिए, किताब बहुत सफल रही। हालांकि, कुछ लोगों ने आलोचना भी की। फिर भी, हजारों लोगों ने कहा कि इस किताब ने उनकी जिंदगी बदल दी।

सीमा का सबसे प्रसिद्ध काम उनका टेडएक्स व्याख्यान है। दरअसल, शीर्षक था “द आर्ट ऑफ सिडक्शन”। हालांकि, यह व्याख्यान टेडएक्स ईलिंग मंच पर दिया गया था। फिर भी, यूट्यूब पर वायरल हो गया। वास्तव में, आज तक 80 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। साथ ही, विभिन्न भाषाओं में उपशीर्षक लगाए गए। दरअसल, इस व्याख्यान में सीमा ने समझाया कि कामसूत्र में लिखे 64 कौशल क्या हैं। इसलिए, लोगों को पहली बार पता चला कि प्राचीन भारत में यौन शिक्षा कितनी व्यापक थी।
इसके अलावा, सीमा ने व्याख्यान में कई दिलचस्प बातें बताईं। दरअसल, प्राचीन काल में प्रेमालाप की शुरुआत कहानियां सुनाने से होती थी। हालांकि, फिर संगीत बजाना, चित्र बनाना, इत्र लगाना जैसी चीजें आती थीं। फिर भी, यह सब इंद्रियों को जागृत करने के लिए था। वास्तव में, यौन आनंद केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक भी था। साथ ही, महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता था। दरअसल, वे आभूषणों की आवाज से अपनी गति नियंत्रित करती थीं। इसलिए, यह बहुत परिष्कृत कला थी। हालांकि, आज यह सब भुला दिया गया है। फिर भी, सीमा इसे वापस ला रही हैं।

सीमा अपने निजी जीवन को बहुत गोपनीय रखती हैं। दरअसल, वे विवाहित हैं और तीन बच्चों की माँ हैं। हालांकि, पति के बारे में कोई सार्वजनिक जानकारी नहीं है। फिर भी, सीमा ने बताया है कि परिवार बहुत सहयोगी है। वास्तव में, पति और बच्चे उनके काम को समझते हैं। साथ ही, बच्चों के जन्म के बावजूद उन्होंने अपना शोध और लेखन जारी रखा। दरअसल, तीसरे बच्चे के जन्म के बाद ही पीएचडी शुरू की थी। इसलिए, वे कामकाजी माताओं के लिए रोल मॉडल हैं।
इसके अलावा, सीमा लंदन, इंग्लैंड में रहती हैं। दरअसल, 23 साल की उम्र से वहां बसी हैं। हालांकि, भारत से गहरा जुड़ाव है। फिर भी, नई दिल्ली में लुक बियॉन्ड इंडिया चलाती हैं। वास्तव में, साल में कई बार भारत आती हैं। साथ ही, व्याख्यान और कार्यशालाएं भी करती हैं। दरअसल, घर में किताबों का बहुत बड़ा संग्रह है। इसलिए, किताबें उनकी सबसे अच्छी दोस्त हैं। हालांकि, रोज पढ़ती और लिखती हैं। फिर भी, परिवार के साथ समय भी देती हैं। वास्तव में, रात के खाने पर परिवार कहानियां साझा करता है। साथ ही, यह उनकी परंपरा है।

जनवरी 2026 में सीमा फिर से चर्चा में आईं। दरअसल, उन्होंने प्रसिद्ध पॉडकास्टर शुभंकर मिश्रा के कार्यक्रम में हिस्सा लिया। हालांकि, बातचीत के दौरान एक विवादास्पद बयान दिया। फिर भी, उन्होंने बताया कि पिछले साल जब वे 63 साल की थीं, तब एक 15 साल के लड़के ने उनसे अभद्र भाषा में बात की। वास्तव में, यह कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। साथ ही, लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। दरअसल, कुछ लोगों ने आलोचना की कि नाबालिग का जिक्र गलत है। इसलिए, विवाद खड़ा हुआ। हालांकि, सीमा का मकसद यह बताना था कि युवा पीढ़ी को सही यौन शिक्षा की कितनी जरूरत है। फिर भी, बयान गलत समझा गया।
इसके अलावा, पॉडकास्ट के छोटे वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से फैले। दरअसल, चार दिनों में 6 लाख से अधिक बार देखे गए। हालांकि, सीमा के इंस्टाग्राम पर भी गतिविधि बढ़ गई। फिर भी, समर्थन और आलोचना दोनों आ रहे थे। वास्तव में, कई लोगों ने कहा कि सीमा का काम महत्वपूर्ण है। साथ ही, युवाओं को भावनात्मक और शारीरिक शिक्षा की जरूरत है। दरअसल, सीमा ने खुद को “एक बड़ी उम्र की महिला युवा दुनिया में” बताया। इसलिए, पीढ़ियों के बीच संवाद बनाना उनका लक्ष्य है। हालांकि, विवाद धीरे-धीरे शांत हुआ। फिर भी, सीमा की चर्चा बढ़ गई।
सीमा की खासियत उनकी शिक्षण पद्धति है। दरअसल, वे सीधे सीधे सिद्धांत नहीं बताती। हालांकि, कहानियों के माध्यम से समझाती हैं। फिर भी, यह तरीका बहुत प्रभावी है। वास्तव में, प्राचीन भारतीय गुरुकुल में भी यही तरीका था। साथ ही, लोग कहानियां जल्दी याद कर लेते हैं। दरअसल, सीमा कहती हैं कि “हम कहानियों का संग्रह हैं”। इसलिए, जो कहानियां हम खुद को सुनाते हैं, वही हमारी वास्तविकता बनती है। हालांकि, कई बार ये कहानियां समाज ने हम पर थोप दी होती हैं। फिर भी, सीमा लोगों को अपनी असली कहानी खोजने में मदद करती हैं।
सीमा कई प्राचीन भारतीय ग्रंथों पर व्याख्यान देती हैं:
दरअसल, सीमा का खास ध्यान महिला कथाओं पर है। हालांकि, प्राचीन ग्रंथों में महिलाओं को अक्सर चुप कराया गया। फिर भी, सीमा उन खोई हुई आवाजों को वापस लाती हैं। वास्तव में, वे दिखाती हैं कि प्राचीन भारत में महिलाएं कितनी सशक्त थीं। साथ ही, उनकी शारीरिक स्वतंत्रता और यौन आनंद का अधिकार था। दरअसल, बाद में ब्रिटिश राज और विक्टोरियन नैतिकता ने ये अधिकार छीन लिए। इसलिए, सीमा का काम बहुत महत्वपूर्ण है।
सीमा को काफी आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है। दरअसल, भारतीय समाज में यौन शिक्षा अभी भी वर्जित है। हालांकि, 21वीं सदी में भी लोग इस पर खुलकर बात नहीं करते। फिर भी, सीमा जैसी 63 साल की महिला जब इन विषयों पर बात करती है, तो कुछ लोगों को अच्छा नहीं लगता। वास्तव में, उन्हें कई बार गालियां भी मिलती हैं। साथ ही, सोशल मीडिया पर नकारात्मक टिप्पणियां आती हैं। दरअसल, कुछ लोग कहते हैं कि यह भारतीय संस्कृति के खिलाफ है। इसलिए, ट्रोलिंग होती है।
इसके अलावा, सीमा आलोचना को सकारात्मक तरीके से लेती हैं। दरअसल, उन्होंने कहा है, “भले ही आप मुझसे असहमत हों, कम से कम बातचीत तो हो रही है। जब हम किसी विषय पर बात करने लगते हैं, तो उसे सामान्य बना सकते हैं।” हालांकि, उनका मानना है कि चुप्पी सबसे बड़ी समस्या है। फिर भी, अगर लोग बहस भी कर रहे हैं, तो यह अच्छा है। वास्तव में, धीरे-धीरे समाज बदलेगा। साथ ही, सीमा कहती हैं कि वे किसी को कुछ थोपना नहीं चाहतीं। दरअसल, बस जानकारी देना चाहती हैं। इसलिए, हर कोई अपना निर्णय खुद ले सकता है।
सीमा को कई सम्मान मिले हैं:
| सम्मान/उपलब्धि | विवरण |
|---|---|
| टेडएक्स व्याख्यान | 80 लाख से अधिक बार देखा गया |
| इंस्टाग्राम | 20 लाख से अधिक अनुयायी |
| यूट्यूब | 2.78 लाख से अधिक सदस्य |
| गिनीज रिकॉर्ड | विश्व की सबसे बड़ी रंगोली |
| पीएचडी | कथा अभ्यास में डॉक्टरेट, महिला कथाओं में विशेषज्ञता |
| यूनेस्को सहयोग | लुप्त हो रही मौखिक परंपराओं का संरक्षण |
| ब्रिटिश म्यूजियम | शैक्षिक सामग्री विकास |
| विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम | शैक्षिक सामग्री विकास |
| पुरस्कार विजेता लेखिका | “द आर्ट्स ऑफ सिडक्शन” अंतरराष्ट्रीय सफलता |
| दिवाली निदेशक | लंदन का सबसे बड़ा दिवाली कार्यक्रम |
| कॉर्पोरेट प्रशिक्षक | नेतृत्व के लिए कहानी कहने की कला |
| लुक बियॉन्ड इंडिया | 1998 से संस्थापक निदेशक |
सीमा की अनुमानित संपत्ति 15-35 करोड़ रुपये (2-5 मिलियन डॉलर) है। दरअसल, उनकी आय के कई स्रोत हैं। हालांकि, मुख्य रूप से:
वास्तव में, सीमा ने अपनी मेहनत से यह संपत्ति बनाई है। साथ ही, परिवार का जीवन आरामदायक है। दरअसल, लंदन में रहना महंगा है। इसलिए, अच्छी आय जरूरी है। हालांकि, सीमा गरीब महिलाओं के लिए मुफ्त कार्यशालाएं भी करती हैं। फिर भी, सामाजिक काम भी जारी है।
सीमा आनंद की कहानी साहस और दृढ़ता की कहानी है। दरअसल, 19 साल की उम्र में पिता की हत्या के बाद टूट जाने वाली लड़की आज दुनिया भर में प्रसिद्ध है। हालांकि, उन्होंने कहानियों में अपना इलाज खोजा। फिर भी, फिर उसी को अपना जीवन लक्ष्य बना लिया। वास्तव में, प्राचीन भारतीय ज्ञान को आधुनिक भाषा में लाना आसान नहीं था। साथ ही, कामसूत्र और तंत्र जैसे वर्जित विषयों पर बात करना और भी कठिन था। दरअसल, समाज ने उनका मजाक उड़ाया। इसलिए, धन मिलना मुश्किल था। हालांकि, सीमा ने हार नहीं मानी।
इसके अलावा, 80 लाख से अधिक बार देखा गया टेडएक्स व्याख्यान और 20 लाख इंस्टाग्राम अनुयायी उनकी सफलता का प्रमाण हैं। दरअसल, 63 साल की उम्र में सोशल मीडिया पर इतनी लोकप्रियता दुर्लभ है। हालांकि, सीमा ने साबित किया कि उम्र कोई बाधा नहीं है। फिर भी, तीन बच्चों की माँ होते हुए भी करियर बनाना और संभालना आसान नहीं था। वास्तव में, यूनेस्को के साथ काम, ब्रिटिश म्यूजियम और विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम के लिए सामग्री बनाना, गिनीज रिकॉर्ड बनाना और लंदन में दिवाली आयोजन की निदेशक बनना – सब बहुत बड़ी उपलब्धियां हैं। साथ ही, कॉर्पोरेट जगत में कहानी कहने की कला सिखाना भी अनोखा है।
दरअसल, सीमा का सबसे बड़ा योगदान महिला कथाओं को वापस लाना है। हालांकि, सदियों से महिलाओं को चुप कराया गया। फिर भी, सीमा दिखा रही हैं कि प्राचीन भारत में महिलाएं सशक्त थीं। वास्तव में, उनका शारीरिक स्वतंत्रता और यौन आनंद का अधिकार था। साथ ही, कामसूत्र केवल पुरुषों के लिए नहीं बल्कि स्त्री और पुरुष दोनों के लिए समान रूप से था। दरअसल, यह ज्ञान खो गया था। इसलिए, सीमा इसे फिर से जीवित कर रही हैं। हालांकि, आलोचना और ट्रोलिंग होती है। फिर भी, लाखों लोग उनसे सीख रहे हैं। वास्तव में, सीमा आनंद की विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी!
63 वर्ष (जनवरी 2026 तक)। दरअसल, जन्म 18 अगस्त 1962 को हुआ।
कहानीकार, पौराणिक कथा विशेषज्ञ, यौन स्वास्थ्य शिक्षिका। वास्तव में, कामसूत्र और तंत्र की विशेषज्ञ।
80 लाख से अधिक बार। साथ ही, “द आर्ट ऑफ सिडक्शन” शीर्षक था।
20 लाख से अधिक। दरअसल, @seemaanandstorytelling हैंडल है।
“द आर्ट्स ऑफ सिडक्शन” (2017/2019)। हालांकि, कामसूत्र पर आधारित है।
हां। फिर भी, तीन बच्चों की माँ हैं। दरअसल, पति का नाम निजी रखा है।
लंदन, इंग्लैंड। हालांकि, नई दिल्ली में लुक बियॉन्ड इंडिया भी चलाती हैं।
पिता (सौतेले पिता) की हत्या। दरअसल, 1982 में यह त्रासदी हुई।
विश्व की सबसे बड़ी रंगोली। वास्तव में, भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देना।
लुप्त हो रही मौखिक परंपराओं का संरक्षण। साथ ही, प्राचीन कहानियों को आधुनिक बनाना।
कामसूत्र, तंत्र, महाभारत, पुराण, भगवद गीता। दरअसल, महिला कथाओं में विशेषज्ञ।
नई दिल्ली में कल्याण केंद्र। हालांकि, 1998 से सीमा निदेशक हैं।
पीएचडी (कथा अभ्यास में)। वास्तव में, महिला कथाओं में विशेषज्ञता।
नेतृत्व के लिए कहानी कहने की कला। दरअसल, टीम निर्माण और संचार।
शुभंकर मिश्रा के पॉडकास्ट में विवादास्पद बयान। हालांकि, वायरल हो गया।